सीहोर। शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर में नवरात्रि के पावन अवसर पर रामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन प्रयागराज से आए कलाकारों ने धार्मिक प्रसंगों पर आधारित विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में शिव विवाह, गणेश वंदना, नारद मोह भंग, मनु-शतरूपा, सीता भूमि प्रवेश, रावण-वेदवती संवाद और रावण जन्म जैसे प्रसंगों की प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण से जुड़े प्रसंगों को जीवंत किया। रामलीला का शुभारंभ संत माधव दास, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा एवं महंत बृजेश शर्मा ने किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी मौजूद रहे। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भक्तों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
रामलीला के पहले दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों ने शिव विवाह की प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपराओं और पौराणिक प्रसंगों से परिचित कराया। इसके बाद गणेश वंदना के साथ अन्य लीलाओं का मंचन आगे बढ़ा। कलाकारों की प्रस्तुतियों में संवाद, अभिनय और प्रसंगों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति देखने को मिली। नारद मोह भंग की लीला में दिखाया गया कि नारद मुनि के मोह से जुड़ी घटना के दौरान भगवान विष्णु ने उन्हें वानर रूप प्रदान किया। इससे नारद मुनि क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को धरती पर जन्म लेने का श्राप दे दिया। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने अहंकार, मोह और उसके परिणामों को मंच पर प्रस्तुत किया। मनु-शतरूपा और रावण जन्म की लीलाओं का भी मंचन किया गया। इसके साथ ही सीता भूमि प्रवेश और रावण-वेदवती संवाद जैसे प्रसंगों को भी प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने पौराणिक कथाओं के विभिन्न पहलुओं को अभिनय के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया। रामलीला के दौरान दर्शक देर रात तक मंचन देखते रहे और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। इस अवसर पर संत माधव दास ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर परिसर में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों की शिक्षा देने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रामलीला का आयोजन और भी आवश्यक है, क्योंकि इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से परिचित कराया जा सकता है। रामायण के प्रसंग मनुष्य को सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। नवरात्रि के अवसर पर प्राचीन श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर में रामलीला के शुभारंभ से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक कथाओं से जुड़ने और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को समझने का अवसर मिल रहा है।

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