दिव्यांग बच्चों के चिकित्सकीय मूल्यांकन शिविर में 175 बच्चों का पंजीयन 60 बच्चों को नए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, 60 के बने यूडीआईडी कार्ड; सहायक उपकरणों के लिए 85 बच्चे चिन्हित


सीहोर, 29 सितंबर। जनपद शिक्षा केंद्र सीहोर में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए दिव्यांग चिकित्सकीय मूल्यांकन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) श्री रमेश राम उइके ने मां सरस्वती के पूजन के साथ किया। शिविर का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड तथा आवश्यक सहायक उपकरणों से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा।


शिविर में कुल 175 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का पंजीयन किया गया। इनमें 60 बच्चों को नवीन दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि 60 बच्चों के यूडीआईडी कार्ड बनाए गए। वहीं 25 बच्चों के यूडीआईडी कार्ड का नवीनीकरण किया गया। उपचार की आवश्यकता वाले 6 बच्चों को रेफर किया गया तथा 15 बच्चों को कैलिपर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के लिए चिन्हित किया गया। इसके अलावा 85 बच्चों को आवश्यक सहायक उपकरणों के लिए चिन्हित किया गया।


शिविर में जिला चिकित्सा दल द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य किया गया। जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) की टीम ने यूडीआईडी कार्ड संबंधी कार्य किया, जबकि एलिम्को की टीम द्वारा बच्चों की आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरणों के लिए चिन्हांकन किया गया।


शिविर में पहुंचे बच्चों एवं उनके अभिभावकों के साथ उपस्थित दल के सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई। इस दौरान बच्चों और अभिभावकों को उपलब्ध शासकीय सुविधाओं एवं योजनाओं की जानकारी भी दी गई।


कार्यक्रम में जनपद संसाधन केंद्र समन्वयक (बीआरसीसी) श्री अशोक कुमार वर्मा, प्रभारी सहायक परियोजना समन्वयक (समावेशी शिक्षा) श्री सीताराम गौड़, समस्त एमआरसी एवं बीएसी, शिक्षक श्रीमती पूनम अवरा, श्रीमती ज्योति मुंजवार, विजेता, श्रीमती मंजू वर्मा एवं श्री प्रेमपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


शिविर की व्यवस्थाओं एवं संचालन की जिम्मेदारी एमआरसी श्रीमती नीलेश राय एवं श्रीमती गायत्री श्रीवास्तव ने निभाई। शिविर के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक सुविधाओं से जोड़ने, आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तथा उनकी शिक्षा एवं सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।



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