कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को हुनर देकर रोजगार से जोड़ना है - कलेक्टर आईटीआई में शत-प्रतिशत प्रवेश और युवाओं को रोजगार दिलाना प्राथमिकता - कलेक्टर जिला कौशल समिति की बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश

 

जिला जनसम्पर्क कार्यालय


सीहोर मध्यप्रदेश


समाचार


सीहोर, 18 अगस्त 2026   कलेक्टर श्री बालागुरू के. की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला कौशल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर द्वारा जिले में कौशल विकास, आईटीआई में प्रवेश, प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

   कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने निर्देश दिए कि जिले की आईटीआई में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और उपलब्ध सीटें खाली न रहें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय और उद्योगों की मांग के अनुरूप ट्रेड्स की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार उनमें बदलाव किया जाए। कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसा हुनर देना होना चाहिए, जिससे वे वास्तविक रूप से रोजगार प्राप्त करने के योग्य बनें।

   कलेक्टर ने आईटीआई प्राचार्य, जिला रोजगार अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्य केवल औपचारिकता के रूप में न किया जाए। अधिकारी स्वयं गांव-गांव पहुंचकर चौपाल एवं अन्य माध्यमों से युवाओं से संवाद करें, उन्हें कौशल विकास की योजनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी दें तथा अधिक से अधिक युवाओं को इनसे जोड़ें। उन्होंने कहा कि कौशल विकास का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने रोजगार मेलों को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि इनमें अच्छी और प्रतिष्ठित कंपनियों को आमंत्रित किया जाए, ताकि युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। साथ ही उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पुराने और घिसे-पिटे पैटर्न पर काम करने के बजाय बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण को अपडेट करने पर जोर दिया।

    बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ना भी विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में किया जाए और युवाओं को मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम तथा प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना जैसी योजनाओं से जोड़ा जाए। बैठक में अधिकारियों को कार्य में लापरवाही अथवा अपेक्षित परिणाम नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

    बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार जिले में मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत 20,902 रिक्तियां उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के अंतर्गत अब तक 8,855 युवाओं को जोड़ा गया है, जिनमें 4,064 ने प्रशिक्षण पूर्ण किया है। वर्ष 2026 में 1,756 युवाओं को योजना से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के अंतर्गत निर्धारित 60 युवाओं का प्रशिक्षण पूर्ण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत जिले में विभिन्न कंपनियों द्वारा अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

   कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ जिले के युवाओं को मिले, इसके लिए विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। साथ ही एमएसएमई एवं उद्योग विभाग के सहयोग से जिले के उद्यमियों के साथ इंडस्ट्री वर्कशॉप आयोजित कर उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए प्रशिक्षण एवं रोजगार की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। बैठक में उद्योग विभाग के महाप्रबंधक श्री अनुराग वर्मा, एनआरएलएम के डीपीएम श्री दिनेश बर्फा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।



 



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