कुरावर में 26 अगस्त को पर्यावरण और तकनीक पर प्रशिक्षण दूधी नदी को संवारने और कचरे के सदुपयोग पर होगा संवाद


कुरावर। ग्रामीण जीवन से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान और नई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को लेकर 26 अगस्त को कुरावर में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होगा। शासकीय माध्यमिक विद्यालय में सुबह 11 बजे से होने वाले इस आयोजन में दूधी नदी संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन मुख्य विषय रहेंगे। कार्यक्रम में 400 से अधिक ग्रामीणों के साथ वैज्ञानिक, रिसर्च स्कॉलर्स, प्रोफेसर और विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे।


प्रशिक्षण में ग्रामीणों को बताया जाएगा कि खेतों से निकलने वाली नरवाई, गोबर तथा घरेलू कचरे का उचित प्रसंस्करण कर इन्हें उपयोगी सामग्री और आय के साधन में कैसे बदला जा सकता है। कचरे के अलग-अलग वर्गीकरण, पुनर्चक्रण और जैविक अपशिष्ट के उपयोग जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। इससे स्वच्छता के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।


दूधी नदी को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए नदी तक पहुंचने वाले अपशिष्ट की रोकथाम, जलस्रोतों की देखरेख और सामुदायिक स्तर पर संरक्षण की कार्ययोजना पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। उद्देश्य नदी संरक्षण को केवल अभियान न बनाकर ग्रामीणों की नियमित गतिविधियों से जोड़ना है।


कार्यक्रम के संयोजक वैज्ञानिक एवं पर्यावरणविद् डॉ. राजकुमार मालवीय हैं। वे ग्रामीणों को शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए विज्ञान आधारित प्रशिक्षण की पहल कर रहे हैं। उनका जोर स्थानीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उपयोगी और टिकाऊ मॉडल विकसित करने पर है।


कुरावर ग्राम पंचायत के सरपंच राधेश्याम मंडलोई ने बताया कि आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम का आयोजन मां हिंगलाज सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान भवन भोपाल प्रायोजक और कर्मयोगी जनकल्याण केंद्र, शाखा जावर सहयोगी संस्था है।


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