सीहोर, 07 जुलाई, 2026 कभी सीमित संसाधनों और संकोच भरे जीवन में रहने वाली बुधनी तहसील के ग्राम पानगुराडिया की श्रीमती ममता यादव आज आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि यह भी साबित किया कि अवसर, सही मार्गदर्शन और मेहनत के दम पर कोई भी महिला अपनी पहचान बना सकती है।
करीब 38 वर्षीय ममता यादव ने वर्ष 2017 में आत्मनिर्भर बनने और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के उद्देश्य से देवांशी स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली। शुरुआत में उनके सामने आत्मविश्वास की कमी और जानकारी का अभाव जैसी चुनौतियां थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वे समूह की बैठकों में सक्रिय भागीदारी करने लगीं।
समूह को प्राप्त 10 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) राशि तथा 1.50 लाख रुपये के सीआईएफ/सीसीएल ऋण के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता ने उनके सपनों को मजबूत आधार दिया। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 02 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहयोग का उपयोग करते हुए उन्होंने अपने गांव में साड़ी की दुकान शुरू की।
व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन ममता ने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने धैर्य, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज उनकी दुकान गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक भरोसेमंद प्रतिष्ठान बन चुकी है। वर्तमान में उनकी दुकान से प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये तक की बिक्री होती है, जबकि वार्षिक टर्नओवर लगभग 3.60 लाख रुपये है। इतना ही नहीं, उनकी वार्षिक बचत 1.10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। इस उपलब्धि के साथ वे 'लखपति दीदी' के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
ममता यादव की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का भी उदाहरण है। आज वे अपने गांव की अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, स्वयं का रोजगार शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
ममता यादव की प्रेरक यात्रा यह विश्वास जगाती है कि आत्मविश्वास, निरंतर सीखने की इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ उठाया गया हर छोटा कदम बड़ी सफलता का आधार बन सकता है। उनकी कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उद्देश्य को साकार करती है और यह साबित करती है कि महिला सशक्तिकरण केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि बदलते भारत की सशक्त वास्तविकता है।
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