सीहोर।लगातार हो रही बारिश के बीच ग्राम पंचायत टिटोरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम भेसाखेड़ी के एक किसान की मेहनत पर जलभराव का संकट मंडराने लगा है। गांव में माता मंदिर के समीप स्थित नाली और पुलिया लंबे समय से चोक पड़ी होने के कारण बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा सीधे किसान को भुगतना पड़ रहा है। खेत में पानी भर जाने से सोयाबीन की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है और अब फसल गलने लगी है। यदि शीघ्र ही पानी की निकासी नहीं कराई गई तो किसान की पूरी फसल नष्ट होने की आशंका है।
ग्राम भेसाखेड़ी निवासी कृषक शिवराज परमार पिता रामसिंह परमार अपनी समस्या को लेकर बुधवार को जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को आवेदन सौंपकर तत्काल राहत दिलाने की मांग की। किसान ने बताया कि उसके खेत के समीप सीसी सडक़ बनी हुई है, जिसके किनारे माता मंदिर के पास स्थित पुलिया और नाली कई महीनों से गाद एवं मिट्टी से भरकर चोक पड़ी है। इसके कारण बरसात का पूरा पानी निकासी न होने से उसके खेत में जमा हो गया है।
किसान का कहना है कि उसका खेत अब किसी तालाब जैसा दिखाई देने लगा है। कई दिनों से खेत में पानी भरा होने के कारण सोयाबीन की फसल पीली पडऩे लगी है और पौधे गल रहे हैं। यदि जल्द ही पानी नहीं निकाला गया तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सरपंच-सचिव से लगाई गुहार, नहीं मिला समाधान
पीडि़त किसान शिवराज परमार ने बताया कि उसने सबसे पहले ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को इस समस्या से अवगत कराया तथा नाली और पुलिया की सफाई एवं गहरीकरण कराने का अनुरोध किया। लेकिन उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि यह कार्य पंचायत के अधिकार क्षेत्र का नहीं है। इसके बाद किसान ने मजबूर होकर जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
फसल खराब होने की भरपाई कौन करेगा?
किसान ने आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि यदि समय रहते नाली और पुलिया की सफाई एवं गहरीकरण नहीं कराया गया और उसकी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई तो उसके नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी। उसने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय की जाए और यदि फसल खराब होती है तो उसे उचित मुआवजा भी दिया
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
किसान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि माता मंदिर के समीप चोक पड़ी पुलिया एवं नाली का तत्काल गहरीकरण और सफाई कराई जाए, ताकि बरसाती पानी की निकासी सुचारू हो सके। साथ ही उसके खेत में भरे पानी को तत्काल बाहर निकालने की व्यवस्था की जाए, जिससे अभी भी बची हुई सोयाबीन की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में अन्य किसानों के खेत भी जलभराव की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए ताकि किसानों को हर वर्ष इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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