सीहोर। लगातार 35 सालों से श्री नृसिंह मानस मंडल के तत्वाधान में शहर के प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में प्रत्येक ग्यारस पर भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी दो दिवसीय भजन संध्या का समापन शुक्रवार को किया गया। इस मौके पर भगवान का फूलों से श्रृंगार कर निर्जला एकादशी का पर्व मनाया गया। इस मौके पर मंदिर के संत माधवदास महाराज, संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, सुनील राय, मनोज दीक्षित मामा आदि ने मंडल के दुर्गेश यादव, विष्णु सेन, देवी सिंह, मिथलेश शर्मा, जसवंत ठाकुर, रमेश मेवाड़ा, विनित विश्वकर्मा आदि का स्वागत सम्मान किया।
इस मौके पर संत माधव महाराज ने कहाकि निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का मात्र धार्मिक महत्त्व ही नहीं है। ये व्रत मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के नज़रिए से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस एकादशी का व्रत करके श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान करने वालों को पूरे साल की एकादशियों का फल मिलता है। इस प्रकार जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
उन्होंने बताया कि एक बार बहुभोजी भीमसेन ने व्यासजीके मुख से प्रत्येक एकादशी को निराहार रहने का नियम सुनकर विनम्र भाव से निवेदन किया कि महाराज! मुझसे कोई व्रत नही किया जाता। दिन भर बड़ी तीव्र क्षुधा बनी ही रहती है। अत: आप कोई ऐसा उपाय बतला दीजिये जिसके प्रभाव से स्वत: सद्गति हो जाय। तब व्यासजी ने कहा कि तुमसे वर्षभर की सम्पूर्ण एकादशी नहीं हो सकती तो केवल एक निर्जला कर लो, इसीसे सालभर की एकादशी करने के समान फल हो जायगा। तब भीम ने वैसा ही किया और स्वर्ग को गये। इसलिए यह एकादशी भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है। शुक्रवार की सुबह यहां पर प्रसादी का वितरण किया गया।

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