सीहोर। आदि अनादि काल से भारतीय संस्कृति में गौमाता को माँ का दर्जा दिया गया है। हमारे वेद, पुराण और शास्त्रों में गौमाता को ईश्वर के समान पूज्यनीय बताया गया है। इसी सनातन परंपरा को जीवित रखते हुए श्रीराम गौशाला गौतीर्थ चिकित्सालय परिसर, सीहोर में प्रतिदिन बीमार, पीडि़त और दुर्घटनाग्रस्त गौमाताओं का उपचार एवं जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह पुण्य कार्य कथा व्यास, परम गौभक्त एवं क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत पंडित मोहितरामजी पाठक के सानिध्य में निरंतर चल रहा है। उनके मार्गदर्शन में समर्पित डॉक्टरों की टीम दिन-रात गौसेवा में लगी हुई है। इस टीम में डॉ. मनोहर घावरी, सौरभ राठौर, रोहन यादव, जितेंद्र नारोलिया, शुभम मालवीय, जितेंद्र परमार, वीरेंद्र मालवीय, मनीष नामदेव, राजकुमार मालवीय, विजय नामदेव सहित अनेक गौसेवक तन-मन-धन से सेवा में जुटे हुए हैं। पंडित मोहितरामजी पाठक ने कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए यदि हमें अपने प्राण भी देने पड़ें, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह संकल्प केवल शब्द नहीं, बल्कि हर दिन की सेवा में साकार होता दिखाई देता है। लेकिन एक ओर जहां गौशालाओं में सेवा और समर्पण की गंगा बह रही है, वहीं दूसरी ओर समाज में गौमाता के साथ हो रही अमानवीय घटनाएं अत्यंत पीड़ादायक हैं। जगह-जगह गौमाताएं कचरे के ढेर में प्लास्टिक और करकट खाने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर उन्हें मारा-पीटा जाता है, और गौहत्या जैसी घटनाएं आज भी देश की आत्मा को झकझोर रही हैं। हजारों गौमाताएं हर दिन सूरज की पहली किरण के साथ इस पावन भारत भूमि पर असहाय अवस्था में कष्ट झेल रही हैं। इतिहास साक्षी है कि मालवा की पुण्यश्लोका महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर ने गौमाता की रक्षा और सेवा का जो व्रत लिया था, उसे पूरी निष्ठा से निभाया। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
समाज के हर वर्ग को यह समझना होगा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। यदि हम सच में सनातन संस्कृति को बचाना चाहते हैं, तो गौसेवा को अपना कर्तव्य बनाना होगा।श्रीराम गौशाला गोतीर्थ क्षेत्र, सीहोर आज एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जहां सेवा, संवेदना और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां न केवल गौमाताओं का इलाज होता है, बल्कि उन्हें एक नया जीवन दिया जाता है आइए, हम सभी मिलकर गौमाता की सेवा और रक्षा का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढिय़ों को हमारी संस्कृति और आस्था का यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित मिल सके।

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