सीहेार। हनुमान जी ने जिस प्रकार भगवान श्री राम जी की भक्ति की, सुदामा जी ने श्रीकृष्ण से मित्रता निभाई हमें भी भगवान की भक्ति हनुमान जी और मित्रता धर्म सुदामा जी की तरह होना चाहिए। बेटियों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए अनेक रूपों में कालनेमी में घूम रहे हैं। बेटियों को सचेत सतर्क रहने की जरूरत है। उक्त बात बुधवार को भागवत कथा के समापन दिवस पर श्रद्धालुओं के मध्य पंडित चेतन उपाध्याय ने कही।
मोती बाबा मंदिर के पास आयोजित कथा में उपाध्याय ने श्री कृष्णा और सुदामा की भक्ति और मित्रता प्रसंग सुनाया तो वही श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह कथा को आधार बनाते हुए कहा कि बेटी का विवाह माता पिता रिश्तेदार अगर भूलवश दुर्जन दुष्ट से कर रह रहे है और यह बात बेटी को मालूम है तो बेटी को विवाह से इंकार कर देना चाहिए देवी रूकमणी का विवाह उनका भाई रूकमी शिशुपाल से कराना चाहता था लेकिन शिशुपाल देवी रूकमणी को स्वीकार नहीं था देवी रूकमणी ने इस विवाह का बहिष्कार कर दिया था और भगवान श्रीकृणा से विवाह किया था। सनातनी बेटियों को वर्तमान में सचेत रहने की जरूरत है क्योंकी विधर्मी अनेक रूपों में हिन्दू बेटियों का धर्मभ्रष्ट करने के लिए घूम रहे है।
श्रीमद भागवत कथा के मुख्य यजमान गोवर्धन गुडउी कुशवाह और आशीष दीपिका कुशवाह ने पंडित प्रदीप पाठक के सानिध्य में विधिवत भगवत गीता और समस्त देवी देवताओं की पूजा अर्चना की और सभी के कल्याण की भगवान से प्रार्थना कर श्रद्धालुओं के साथ श्रीमद भागवत कथा का श्रवण किया। कथा कार्यक्रम में संत उद्धावदास महाराज,पंडित नरेश तिवारी एवं विशिष्टजनों का आगमन हुआ। पंडित उपाध्याय ने भगवान श्री कृष्णा के मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति से विभोर कर दिया। मधुर भजनों पर श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ नाचते दिखाई दिए।
मुख्य यजमान और श्रद्धालुओं के द्वारा पंडित प्रदीप पाठक भगवत गीता और समस्त देवी देवताओं की पूजा अर्चना की गई प्रसादी वितरण के बाद सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का मंगल में समापन किया गया। श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए शहर सहित आसपास के ग्रामीण अंचल के श्रद्धालु भी कार्यक्रम में पहुंचे। मुख्य यजमान आशीष दीपिका कुशवाहा ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया।

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