सीहोर। भोलेबाबा का श्रृंगार भक्त को शिव संस्कार से जोड़ता है। कैलाश पर्वत पर सर्प,बिच्छु, शेर, नंदी, मोर चूहा जैसे प्राणी स्वभाव से एक दुसरे के विरोधी होते है किंतू शिव कृपा से समरसता एकता से रहते है यही शिव संस्कार है। हमें भी परिवार में कालोनी में प्रदेश देश में एकता अखंडता से रहना चाहिए। महाकाल का महा प्रताप सनातन ही नही हर धर्म संप्रादाय में मिलता है उक्त उद्गार शुक्रवार को मोती बाबा मंदिर स्थित परिसर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालुओंं को शिव विवाह प्रसंग सूनाते हुए पंडित चेतन उपाध्याय ने प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के तीसरे दिन पंडित प्रदीप पाठक के सानिध्य में मुख्य यजमान आशीष कुशवाह ने सपत्नि भगवत गीता एवं समस्त देवी देवताओं का पूजन किया। तत्पश्चात पंडित चेतन उपाध्याय ने मधुर श्रीकृष्ण भजनों के साथ भागवत कथा का शुभारंभ किया। उन्होने कहा कि माता पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या कर भोलेनाथ को वरदान देने पर विवश कर दिया। भारत की नारी अगर ठान ले तो ईश्वर को भी झुकाने का दम रखती है। विभिन्न धर्मिक घटनाक्रमों के साथ शिव और पार्वती का विवाह तय हुआ। शिव बारात में दुनिया भर के हजारों भूत पिसाज शामिल हुए बारात में ब्राम्हजी और विष्णू भगवान सहित देवी देवता संतजन भी शामिल हुए। कथा पंडाल में शिव और पार्वती के मध्य वरमाला हुई। विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से पंडित चेतन उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को भक्ति का मार्ग दिखाया।

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