सीहोर कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत दिनांक 11 मार्च 2026 से 13 मार्च 2026 तक आर.के. कृषि महाविद्यालय, सीहोर में विदिशा जिले के विकासखंड विदिशा एवं गंज बासौदा के उन्नतशील किसानों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, अंतरवर्ती फसल प्रणाली तथा प्राकृतिक खेती के बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था। प्रशिक्षण के दौरान महाविद्यालय के प्रख्यात वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में किसानों को अंतरवर्ती फसल प्रणाली, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों तथा इनके लाभों के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही रासायनिक, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के बीच अंतर भी स्पष्ट किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान महाविद्यालय परिसर में चल रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों एवं प्रायोगिक खेतों का फील्ड विजिट भी किया। इस दौरान किसानों को विभिन्न फसल किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई, जिनका प्रदर्शन महाविद्यालय में किया गया है। किसानों ने खेतों में चल रहे विभिन्न प्रयोगों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और वैज्ञानिकों से उनके बारे में चर्चा भी की। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने बताया कि वर्तमान समय में सोयाबीन का उत्पादन कम हो रहा है। इस विषय पर महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक सुझाव दिए। डॉ. एस. सी. गुप्ता (प्रभारी अधिष्ठाता) ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य एवं पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के बारे में बताया तथा विशेष रूप से दलहनी फसलों में पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के उपाय समझाए। उन्होंने मोलिब्डेनम (Molybdenum) तत्व के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और बताया कि यह तत्व विशेष रूप से दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देकर उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. जी. एस. गाठिये ने किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती एवं रासायनिक खेती के परिणामों तथा उनके प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय में स्थापित आलू की ऐरोपोनिक्स यूनिट के बारे में भी किसानों को विस्तार से समझाया। डॉ. अमित कुमार एवं डॉ. लालू प्रसाद द्वारा किसानों को उद्यानिकी फसलों की उन्नत तकनीकों तथा उनके आर्थिक लाभों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। डॉ. डी. के. प्यासी ने किसानों को पादप प्रजनन (Plant Breeding) तथा उन्नत किस्मों के विकास की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी और बताया कि नई फसल किस्में किस प्रकार विकसित की जाती हैं। डॉ. सुधीर सिंह द्वारा किसानों को तिलहनी एवं दलहनी फसलों के बारे में विशेष जानकारी दी गई तथा सोयाबीन की बुवाई से लेकर कटाई तक की संपूर्ण उन्नत तकनीक विस्तार से समझाई गई। वहीं डॉ. लेखराम ने किसानों को पादप रोगों की पहचान एवं उनके नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत सहित प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न जैविक उत्पादों को बनाने एवं उपयोग करने की विधि भी सिखाई गई। किसानों ने कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया कि वे नरवाई प्रबंधन अपनाते हुए अपने खेतों के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक खेती को भी अपनाएंगे तथा यहां प्राप्त जानकारी को अपने-अपने गांवों के अन्य किसानों तक भी पहुंचाएंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विदिशा जिले से किसानों को लाने तथा प्रशिक्षण में सहभागिता सुनिश्चित कराने में नोडल अधिकारी ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर श्री प्रदीप मालवीय तथा श्री निलेश जामालिया का भी विशेष सहयोग रहा। उनके द्वारा किसानों को विदिशा से सीहोर स्थित कृषि महाविद्यालय में प्रशिक्षण हेतु लाया गया तथा पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों का मार्गदर्शन एवं समन्वय किया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. डी. के. प्यासी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी किसानों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं लाभदायक बताते हुए कृषि महाविद्यालय, सीहोर के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया।

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