राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई, वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के षष्ठ दिवस की शुरुआत प्रातः प्रभात फेरी से हुई। शांत एवं अनुशासित वातावरण में स्वयंसेवकों ने गांव की गलियों से गुजरते हुए सामुदायिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।
प्रभात फेरी के पश्चात स्वयंसेवकों ने गांव में स्वच्छता अभियान चलाया। गलियों, सार्वजनिक स्थलों और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया गया। इस अभियान ने ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता को और मजबूत किया।
इसके बाद वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत स्वयंसेवकों ने विभिन्न स्थानों पर पौधे रोपे। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध हुई। ग्रामीणों ने भी पौधों की देखभाल का संकल्प लिया, जिससे गांव को भविष्य में हरियाली और शुद्ध वायु मिल सके।
समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए स्वयंसेवकों ने गांव के बच्चों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की तथा उन्हें नियमित अध्ययन और शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। बच्चों के चेहरों पर झलकती खुशी इस प्रयास की सफलता को दर्शाती रही।
इसके पश्चात एक ज्ञानवर्धक बौद्धिक सत्र आयोजित किया गया, जिसका विषय था “बाल कल्याण एवं मानव अधिकार”। इस सत्र में बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत एक स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधियों ने बच्चों के अधिकारों, उनके संरक्षण, शिक्षा के महत्व तथा मानव अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। विशेष रूप से बाल तस्करी, शोषण से बचाव और बालिकाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा की गई। यह सत्र स्वयंसेवकों के लिए अत्यंत जागरूकता बढ़ाने वाला एवं विचारोत्तेजक सिद्ध हुआ।
दोपहर पश्चात स्वयंसेवकों ने गांव भ्रमण के दौरान महिला सशक्तिकरण विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के माध्यम से महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समान अधिकारों का प्रभावी संदेश दिया गया। ग्रामीणों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने वाला प्रयास बताया।
दिन के अंतिम चरण में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों ने गीत, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और आपसी एकता का परिचय दिया।
शिविर के षष्ठ दिवस की सभी गतिविधियाँ कार्यक्रम अधिकारियों डॉ. विनोद भट्ट, डॉ. देव ब्रत गुप्ता, डॉ. गीतांजलि गिरी एवं सुश्री दीप्ति भोजवानी के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं।


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