फाग और लोक संस्कृति की तान से शिवना साहित्य समागम का समापन शब्दों का कुंभ: सीहोर में शिवना साहित्य समागम का भव्य आगाज़, देशभर के रचनाकारों का जमावड़ा सिद्धपुर सभामंडप में उद्घाटन के साथ शुरू हुआ दो दिवसीय साहित्योत्सव; तीन सभागारों में 12 वैचारिक सत्र, पुस्तक लोकार्पण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से महकेगी मालवा की धरा


सीहोर। साहित्य, संस्कृति और विमर्श की त्रिवेणी 'शिवना साहित्य समागम 2026 का शंखनाद शनिवार सुबह सीहोर की ऐतिहासिक धरती पर हो गया। साहित्य और होली का समागम भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत सुंदर रंगीन और जीवंत पक्ष है। होली का त्योहार सिर्फ रंगों का नहींबल्कि भावनाओं भाईचारे और सृजन का उत्सव है जिसे हिंदी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में बड़े ही अनूठे ढंग से पिरोया है। इंदौर-भोपाल बायपास स्थित क्रिसेंट रिसोर्ट एंड क्लब में आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव ने शहर को देश के साहित्यिक मानचित्र पर प्रमुखता से अंकित कर दिया है। शनिवार सुबह 9:45 बजे सिद्धपुर सभामंडप में दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ इस महाकुंभ का शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर से जुटे सैकड़ों साहित्यकारों, पत्रकारों और सुधी पाठकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा ब्लू बर्ड स्कूल की अहम भूमिका रही, जिसमें विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन और समर्पण भाव से देश भर से साहित्यकारों का स्वागत और सम्मान किया। वहीं संचालन पंकज सुबीर ने किया।

उद्घाटन सत्र: परंपरा और आधुनिकता का विमर्श-उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता जगतगुरु पंडित अजय पुरोहित ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय, विधायक सुदेश राय, प्रिंस राठौर, श्रीमती नमिता राय और श्रीमती अरुणा राय मंचासीन रहे। सत्र का कुशल समन्वय डॉ. गरिमा संजय दुबे और स्मृति आदित्य ने किया। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि सीहोर जैसे ऐतिहासिक नगर में इस स्तर का आयोजन हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा। उद्घाटन के पश्चात पूरा परिसर वैचारिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।


प्रथम दिन के सत्र: विविध विषयों पर गहन मंथन, आज दिनभर तीन अलग-अलग सभागारों में समांतर सत्रों का दौर चला, जिनमें साहित्य के हर पहलू पर चर्चा की गई, सिद्धपुर सभामंडप वैचारिक विमर्श, धर्म और साहित्य: प्रथम सत्र में 'धर्म और साहित्य का अंतर्संबंध विषय पर यतींद्र मिश्र और विकास दवे ने सारगर्भित विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और धर्म दोनों ही मनुष्य को परिष्कृत करने का कार्य करते हैं। सिनेमा और साहित्य: दूसरे सत्र में अभिनेता यशपाल शर्मा और प्रतिभा सुमन शर्मा ने फिल्मों में साहित्य की घटती भूमिका और पटकथा लेखन की चुनौतियों पर बात की। स्वास्थ्य और जीवन: दोपहर के सत्र में डॉ. विजय सक्सेना और अखिलेश राय ने 'कैसे स्वस्थ रहे कोईÓ विषय पर महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए। कविता की पाठशाला: शाम के सत्र में वरिष्ठ कवि राजेश जोशी ने कविता के शिल्प और उसकी सामाजिक सरोकारिता पर प्रकाश डाला। थर्ड जेंडर संघष:र् एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील सत्र में महामंडलेश्वर संजना सखी, ममता नायक और पायल जान ने 'थर्ड जेंडर के जीवन संघर्ष पर अपनी बात रखकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।

सिपाही बहादुर सभागार सृजन और समाज

इस सभागार में शिखरों के वारिस, नई सदी की नई कविताऔर 'नई सदी की नई कहानी जैसे विषयों पर चर्चा हुई। यहाँ लीलाधर मंडलोई, उर्मिला शिरीष, प्रज्ञा पाण्डेय और रेखा कस्तवार जैसे दिग्गजों ने वर्तमान कथा-साहित्य के बदलते स्वरूप पर अपनी राय रखी।

विशेष रूप से 'पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर आयोजित सत्र में अनुराग द्वारी, पंकज शुक्ला, ब्रजेश राजपूत और शैलेन्द्र पटेल ने मीडिया के सामने मौजूद चुनौतियों और 'फेक न्यूज के दौर में पत्रकारिता के धर्म पर तीखी और सार्थक बहस की।


कुँवर चैनसिंह सभागार भविष्य और विमोचन

दोपहर में बच्चों के लिए समर्पित विशेष सत्र भविष्य से संवाद आयोजित हुआ, जिसका संचालन पंकज सुबीर ने किया। इसके उपरांत एक भव्य 'पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम हुआ, जिसमें सुधा ओम ढींगरा, तेजेन्द्र शर्मा, यतींद्र मिश्र, और नीलिमा शर्मा सहित करीब 20 लेखकों की नवीन कृतियों का विमोचन डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी और यशपाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।

आज शाम: सम्मान समारोह और भगोरिया की गूँज

आज शाम 7 बजे से लीजो हॉल में आयोजित भव्य 'सम्मान समारोह समागम का मुख्य आकर्षण होगा। इसमें लीलाधर मंडलोई को उनकी आत्मकथा के लिए अंतर्राष्ट्रीय शिवना सम्मान 2025 से नवाजा जाएगा। साथ ही प्रभात रंजन, मनीश वैद्य, मुकेश नेमा, स्मृति आदित्य, प्रवीण कक्कड़, रश्मि कुलश्रेष्ठ और शुभ्रा ओझा को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया जाएगा।

सम्मान समारोह के पश्चात रात्रि 9 बजे से मालवा की प्रसिद्ध लोक संस्कृति भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति होगी, जिसमें स्थानीय कलाकारों द्वारा ढोल की थाप पर लोक जीवन के रंगों को बिखेरा जाएगा। इसके उपरांत सभी अतिथियों के लिए रात्रि भोज का आयोजन होगा।

आज के प्रमुख आकर्षण

समागम के दूसरे दिन यानी 1 मार्च को भी सत्रों का सिलसिला जारी रहेगा। कल मुख्य चर्चा के विषय 'डिबेट या न्यूज़, 'राजनीति की डगर में फूल और काँटे और 'लघुकथाओं की मंडी रहेंगे। समापन समारोह कल शाम 4 बजे 'सिद्धपुर सभामंडप में होगा, जिसमें पारंपरिक 'फाग गायन और लोक पकवानों के साथ उत्सव को विदाई दी जाएगी।

रेडियो कर्मवीर की गूँज-आयोजन को वैश्विक मंच देने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की 'रेडियो कर्मवीर 90.0 एफएम की टीम सीहोर में डेरा डाले हुए है। टीम द्वारा लगातार लाइव बाइट्स और साक्षात्कारों का रिकॉर्डिंग की जा रही है, जिससे यह आयोजन रेडियो के माध्यम से घर-घर पहुँच रहा है।

आयोजन समिति का प्रयास-इस सफल आयोजन के पीछे यतींद्र मिश्र, यशपाल शर्मा, अखिलेश राय, श्रीमती मनीषा कुलश्रेष्ठ और श्रीमती ज्योति जैन की मेहनत साफ नजर आ रही है। परामर्श समिति के लोकेन्द्र मेवाड़ा, कैलाश अग्रवाल और पंकज सुबीर सहित समूची टीम अतिथियों के सत्कार और सत्रों के सुचारू संचालन में जुटी है। सीहोर के नागरिक भी इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं साहित्य के इस 'महाकुंभ में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।


Post a Comment

0 Comments