सीहोर। शहर के शीतल विहार कालोनी के पीछे वृन्दावन कालोनी में श्री सांवरिया सेवा समिति के तत्वाधान में श्री सांवरिया सेठ एवं चौरासी महादेव प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन आगामी एक फरवरी से सात फरवरी तक किया जाएगा। इस मौके पर आगामी 31 जनवरी को भव्य कलश यात्रा के साथ महोत्सव की शुरूआत की जाएगी।
श्री सांवरिया सेठ 84 महादेव मंदिर का ध्वजा रोहण किया गया सर्व प्रथम गणेश पूजन आचार्य पं रविन्द्रचार्य शर्मा पं मनीष शर्मा पं वीरेंद्र शर्मा दुवरा पूजन कराई गई विधयाक सुदेश राय और श्रीमती अरुणा राय, मंदिर समिति अध्यक्ष उषाराज शर्मा अंजू राकेश गुप्ता शारदा आरके खेरा मंजू प्रवीण तिवारी निर्मला शर्मा राजेवारी शर्मा रेखा शुक्ला, विभा शुक्ला, सरोज रावत, कल्पना दुबे, आशा शर्मा निर्मला शर्मा प्रकाशवती पाठक अरुणा दाबी संगीता बनवैया शह्म् भी अन्य समिति के सदस्य के दुवरा धुव्ज पूजन किया गया दिनांक 31 जनवरी को कलश यात्रा 1 फरवरी से 7 फरवीर तक श्रीमद भागवत कथा का आयोजन भी हो रहा हे आप सभी शहर वासियो सादर आमंत्रित हे
इस संबंध में जानकारी देते हुए श्री सांवरिया सेवा समिति की अध्यक्ष श्रीमती उषा राज शर्मा ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, पंडित कटारे बाबा के आशीर्वाद से महोत्सव के अंतर्गत सात दिवसीय महोत्सव में प्राण-प्रतिष्ठा के अलावा कथा वाचक पंडित रविन्द्राचार्य के द्वारा भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कालोनी में सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। शहर के इतिहास में श्री सांवरिया सेठ और चौरासी महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा पूर्ण विधि-विधान से मंदिर में करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सांवरिया सेठ : योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की वह सांवली छवि... जिसकी उपासक भक्त मीरा बाई रहीं। इसी सांवरिया सेठ का रूप धारण कर वंशी वाले ने नरसिंह मेहता की नानी बाई का मायरा भरा। 1840 में भोलाराम गुर्जर के सपने में आकर ... सारे भक्तों के अपने हो गए... ऐसे अपने हुए कि सभी के कष्टों के निवारण का तीर्थ बन गया ... भादसोड़, मंडफिया और प्राकट्य स्थल तीन स्थानों पर विराजे सांवरिया सेठ अब प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की नगरी सिद्धपुर सीहोर में पधार रहे हैं... सांवरिया सेवा समिति को यह अवसर सांवरिया सेठ की कृपा से मिला है। इसके अलावा चौरासी महादेव-चौरासी लाख योनियों के आगमन से मुक्ति यानि मोक्ष की अवधारणा आशुतोष भगवान भोलेनाथ से जुड़ी है वह मोक्ष की नगरी वाराणसी के काशी विश्वनाथ है अथवा महाकाल की नगरी उज्जैन में 84 महादेव हैं। एक समय उज्जैन में दूषण नामक असुर ने अपने अत्याचार और आतंक से महाकाल नगर वासियों को त्रस्त कर दिया उसके संहार करने में परेशानी यह थी कि जहां उसके रक्त की बूंद गिरेगी वहां एक और दूषण पैदा हो जायेगा उक्त समस्या के समाधान हेतु शिव ने अपनी बहन क्षिप्रा से आग्रह किया रक्त को अपनी जलराशि में समाहित करले क्षिप्रा के आगमन में कुछ बिलम्ब हो गया उसके रक्त की बूंद जब गिरी वहां शिव ने 84 रूप धारण कर उसका संहार किया। शिव जी के यही 84 रूप उज्जैन में स्थापित है अब और श्री महादेव अपने पुत्र चिंतामन गणेश की नगरी सिद्धपुरी सीहोर में विराजित होने जा रहे है।

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