कलेक्टर बुधनी पहुंचकर किया सारू-मारू की गुफाओं की निरीक्षण जिले की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पहचान हैं सारू-मारू की गुफाएं - कलेक्टर


सीहोर, 16 जनवरी, 2026    कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने बुधनी तहसील के ग्राम पान गुराड़िया स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व की सारू-मारू की गुफाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गुफाओं, बौद्ध स्तूपों एवं शिलालेखों का अवलोकन किया और प्राचीन धरोहर के संरक्षण के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने यह भी कहा कि सारू-मारू की गुफाएं जिले की ऐतिहासिक पहचान हैं।

  उल्लेखनीय है कि सारू-मारू की गुफाएं सीहोर जिले की बुधनी तहसील अंतर्गत ग्राम पान गुराड़िया के समीप स्थित एक प्राचीन बौद्ध मठ परिसर एवं पुरातात्विक स्थल हैं, जिनका संबंध तथागत गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्यों महामोद्गलायन और सारिपुत्र के काल से माना जाता है। यह स्थल सांची से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां प्राकृतिक गुफाओं के साथ-साथ अनेक बौद्ध स्तूप निर्मित हैं। गुफाओं में स्वस्तिक, त्रिरत्न एवं कलश जैसे बौद्ध प्रतीकों के भित्तिचित्र आज भी देखे जा सकते हैं, जो इस स्थल की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।

   इस स्थल का विशेष महत्व इस कारण भी है कि यहां मुख्य गुफा में सम्राट अशोक से संबंधित दो महत्वपूर्ण शिलालेख प्राप्त हुए हैं। इनमें से एक शिलालेख में अशोक के पुत्र महेंद्र की यात्रा का उल्लेख मिलता है, जबकि दूसरे शिलालेख से यह जानकारी मिलती है कि सम्राट अशोक ने विदिशा में निवास के दौरान इस स्थल की यात्रा की थी। इतिहासकारों के अनुसार यहां मौजूद कुछ गुफाएं और स्तूप सम्राट अशोक के राज्यकाल से भी पूर्व के हैं। बुद्ध काल में बुधनी क्षेत्र को ‘बुद्धनगरी’ के रूप में जाना जाता था और आसपास के क्षेत्रों में भी बौद्ध स्तूपों के अवशेष पाए गए हैं। लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैली इस पहाड़ी पर शैल चित्रों के साथ-साथ 25 से अधिक बौद्ध स्तूप मौजूद हैं, जिनका संरक्षण राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है।

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