सीहोर। शहर के कस्बा स्थित श्रीराम मंदिर राठौर धर्मशाला में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी सात दिवसीय भव्य संगीतमय श्रीमद भागवत कथा अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिवस कथा व्यास महंत उद्वाव दास महाराज ने राजा परीक्षित के मोक्ष का सार का विस्तार से वर्णन करते हुए कहाकि व्यक्ति को मृत्यु और भगवान का स्मरण जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण देता है, जिससे उसे अपने जीवन का मूल्य समझ आता है और हर क्षण का सदुपयोग करने की प्रेरणा मिलती है। इसके परिणामस्वरूप, वह क्षणभंगुर जीवन से विरक्ति प्राप्त कर और सांसारिक मोह-माया से दूर होकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो सकता है, जिससे उसे शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
भागवत कथा के तीसरे दिन राजा परीक्षित को मोक्ष मिलने की कथा सुनाई और बताया कि शुकदेव जी और राजा परीक्षित के मिलन के बाद राजा को भागवत कथा का अमृत पान कराते हैं। इस कथा को सुनकर राजा परीक्षित का मन भौतिक संसार से हट जाता है और उन्हें जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है, जिसके बाद वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के मन के विकार दूर हो जाते हैं और सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। महाराज परीक्षित की कथा का वर्णन करते हुए महंत ने कहा कि वह कलिकाल के प्रभाव से ऋषि के गले में मरे हुए सर्प की माला डालने से श्राप ग्रसित हो गए थे। भागवत कथा श्रवण से ही राजा परीक्षित परम गति को प्राप्त हुए।

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