सीहोर। भागवत कथा का श्रवण करने से हमारे पापों का अंत होता है, भागवत वही अमर कथा है, जिसे भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाया था। कथा सुनना भी सबके भाग्य में नहीं होता है, जब भगवान भोलेनाथ से माता पार्वती ने अमर कथा सुनाने की प्रार्थना की तो बाबा भोलेनाथ ने कहा कि जाओ पहले यह देखकर आओ की कैलाश पर तुम्हारे या मेरे अलावा कोई और तो नहीं है। क्योंकि, यह कथा सबके नसीब में नहीं होती है। माता ने पूरे कैलाश पर नजर दौड़ाई, लेकिन उनकी नजर शुक के अपरिपक्व अंडों पर नहीं पड़ी। उक्त विचार शहर के बस स्टैंड के समीपस्थ जारी सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने कहे। मंगलवार को आस्था और उत्साह के साथ भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारें लगाए।
उन्होंने कहाकि भगवान शंकर ने पार्वती को जो अमर कथा सुनाई वह भागवत कथा ही थी। लेकिन, कथा के बीच ही माता पार्वती को नींद आ गई और शुक ने पूरी कथा सुन ली। दूसरे दिन भागवत कथा में अमर कथा व शुकदेव के जन्म का वृतांत विस्तार से सुनाया। पूर्व जन्मों के पाप का ही प्रभाव होता है कि कथा बीच में छूट जाती है। भगवान की कथा मन से नहीं सुनने से जीवन में धार्मिकता नहीं आ पाती। कथा सुनने से चित्त पिघलता है और पिघला चित ही भगवान को अपने में बसा सकता है। श्री शुक देव द्वारा चुपके से अमर कथा सुन लेने के कारण जब भोले बाबा शंकर ने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया तो वह एक ब्राह्मणी के गर्भ में छुप गए। कई वर्षों बाद व्यास के निवेदन पर भगवान शंकर इस पुत्र के ज्ञानवान होने का वरदान देकर चले गए।
जब जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ता
पंडित श्री उपाध्याय ने कहाकि जब जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मनुष्य इस सांसारिक मोह में फस कर अपने जीवन को व्यर्थ गंवा देता है। मनुष्य अपने मन के कुविचारों को निकाल कर परमेश्वर का ध्यान लगाता है तो वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। कथा के दौरान फूलों की होली खेली गई और भगवान श्री कृष्ण के जयकारों के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान कथा पंडाल को भव्य तरीके से सजाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने के लिए पहुंचे शाम को आरती कर प्रसादी वितरित की गई।


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