सोयाबीन की फसल का कम भाव होने पर किसानों ने किया जमकर खेतों में प्रदर्शन जब सोयाबीन से बनने वाले उत्पादों का भाव आसमान छू रहे हैं तो सोयाबीन सस्ता क्यों

सीहोर। सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम चन्देरी के किसान व समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में सीहोर जिले के ग्राम तज, चोंडी, चंदेरी जैसे अन्य गांवों के किसानों ने देश के प्रधानमंत्री मोदी जी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मध्य प्रदेश के यशस्वमी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव अवगत कराया गया है कि प्राकृतिक असंतुलन एवं कीटों व नानाप्रकार की बीमारियों के कारण सोयाबीन फसल की उपज नाममात्र की हो रही है, वहीं सोयाबीन की फसल बोने से लेकर खाद, उर्वरक, कीटनाशक दवाइयों में इतना खर्च आ रहा है कि सोयाबीन की फसल घाटे का सौदा हो रहा है और किसानों को सोयाबीन की फसल का जो भाव मिल रहा है, उसमें किसानों की लागत भी नही निकल रही है। जिसको लेकर किसानों ने खेत में अनोखा प्रदर्शन कर मांग की है कि विगत् 8 वर्षों पुराने 4000 रूपये प्रति क्वींटल वाले भव से ही सोयाबीन क्रय की जा रही है,वहीं दूसरी ओर सोयाबीन से बनने वाले खाद्यानों भाव आसमान छू रहे हैं, तो फिर किसानों से ही यह भेदभाव क्यों ? इसलिये सोयाबीन की फसल का भाव 6000 रूपये प्रति क्वलींटल किया जाये। सोयाबीन की फसल का कम भाव होने के कारण किसान कर्ज के दलदल में धसता चला जा रहा है। मांग करने वालों में प्रमुख रूप से किसान में दुर्गा प्रसाद, अमर सिंह मेवाड़ा, पंकज विश्वकर्मा, मोहन पटेल, समर सिंह, मोर सिंह, समर सिंह, राजमल मेवाड़ा, गोविंद सिंह, संजय अग्रवाल, राकेश मेवाड़ा प्रमुख है सभी किसानों ने यह भी कहा कि हमारे कृषि प्रधान देश में सरकार को किसानों पर ध्यान देना होगा और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये किसानों की दशा 


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