सीहोर। जितने भी संप्रदाय मत मतांतर वर्तमान में प्रचलित हैं वास्तव में वह सभी 4000 वर्ष के बाद के है, इसके पूर्व सृष्टि के प्रारंभ से ईश्वर द्वारा प्रतिपादित वैदिक धर्म ही रहा है । उक्त उद्गार अन्तर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता पूज्य आचार्य श्री आनंद पुरुषार्थी जी ने सीहोर आर्य समाज के छ: दिवसीय वेद प्रचार महोत्सव में पांचवें दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा मध्यकाल में जब भारत परतंत्रता की बेडिय़ों में बंधा तो अनेक विधर्मियों ने हमारे धर्मग्रंथो में मिलावट की हमारे वेदभाष्य प्रदूषित किये। भोले भाले हिंदू विभिन्न प्रकार के अंधविश्वास और रूढिय़ों में फंसते चले गए। धर्म के नाम पर हमें अधर्म पढ़ाया गया । तब गुजरात के टंकारा में बहु प्रतिभा सम्पन्न बच्चे का जन्म हुआ और बाद में उन्होने युवावस्था में गृह बंधनो से विरत रहकर पूरे देश का भ्रमण किया । तत्कालीन परिस्थिति देखकर आर्य समाज की स्थापना की । आर्यों को नारा दिया। वेदों की ओर लोटे.. गुलामी की जंजीरे तोड़े।
देश की गुलामी से मुक्ति हेतु नरम व गरम दल दोनों मे आर्य समाज के अनुयायियों ने अभूतपूर्व योगदान दिया, जिसके कारण न केवल देश आजाद हुआ अपितु वेदों का जैसे पुनरुद्धार हो सका । इतिहासकारों ने लिखा है कि जेलों में बंद 80 प्रतिशत से ज्यादा कैदी आर्य समाजी थे ।
आर्य समाज के कारण तत्कालीन भटकती हिंदू जाति को मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और उस कारण शताधिक गुरुकुल खुले,हजारों लाखों बच्चे वेदों के विद्वान् बने माता बहनों को यज्ञ करने का अधिकार मिला शूद्र भाइयों को यज्ञवेदी में बैठकर आहुति देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । अनाथालय खुले अनाथ बच्चों को सहारा मिला। 16 संस्कारो की परंपरा प्रारंभ हुई। गौ शालाये बनी, गौ माता पर सदियों से अत्याचार होता था वह बंद हुआ । शुद्ध त्रैतवाद की स्थापना हुई ।
पूरे भारत में समाज सुधार के जितने काम थे आर्य समाज ने क्रमश: सभी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जो स्कूल नहीं जा सकती थी उन बेटियों के लिये स्कूल व गुरुकुल खोले । आर्य समाज मंदिरों की स्थापना की गई ।
आज आवश्यकता है पूरी हिंदू जाति वैदिक धर्म के सिद्धांतों को जीवन में उतारें। 16 संस्कारों के आधार पर अपनी संतान का निर्माण करें और आर्य समाज के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाएं महर्षि दयानंद जी की जन्म को दो सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं इस समय हमारा उत्तरदायित्व बढ़ गया है ।
आचार्य आनंद पुरुषार्थी जी के प्रवचन के पूर्व पं0 भीष्म आर्य जी बिजनौर उत्तर प्रदेश मधुर भजन हुए। उन्होंने ईश्वर वेद और देश भक्ति के भजन सुनाकर पूरी जनता जनार्दन को अपनी और आकृष्ट किया । सम्पूर्ण कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में आर्य समाज मंदिर में आर्यों की उपस्थिति देखी गई।
आर्य समाज के महामंत्री आर्य रितेश राठौर ने संवाददाता को बताया कि अंतिम दिन का समापन कार्यक्रम आर्य समाज की सभागृह में स्थान कम होने के कारण और श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण स्थान परिवर्तित कर राठौर धर्मशाला में स्थानांतरित कर दिया गया है। एक सितंबर को प्रात: 8:00 बजे से 10:00 के मध्य राठौर धर्मशाला में आर्य समाज के वेद प्रचार सप्ताह का बृहत् स्तर पर समापन होगा जिसमें करीब 25 यज्ञवेदियो पर 100 यजमान दंपत्ती बैठेंगे और समाज, राष्ट्र के कल्याण की आहुतियां प्रदान करेंगे।
आर्य समाज के प्रधान एवं सभी पदाधिकारियों ने समस्त नगर वासियों से आज आयोजन के समापन दिवस पर राठौर धर्मशाला गंज में आने की अपील की है।

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