अपने संतान को आस्तिक बनाना माता-पिता की जिम्मेदारी है- आचार्य आनंद पुरुषार्थी

सीहोर। नई पीढ़ी की सामान्य गतिविधियों में नास्तिकता या धर्म के प्रति अविश्वास दिखाई देता है। माँ पिता के कैरियर बनाने के दबाव में बच्चे अपनी सहजता खोते चले जा रहे हैं। उक्त विचार नर्मदापुरम से पधारे हुए अंतर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता आचार्य आनंद पुरुषार्थी जी ने व्यक्त किए ।

आर्य समाज गंज सीहोर के वेद प्रचार सप्ताह के उपलक्ष्य में आयोजित छ: दिवसीय कार्यक्रम में चौथे दिन के प्रवचन में आचार्य श्री पुरूषार्थी जी ने कहा बुद्धि के तीव्र होने से ज्यादा बुद्धि का पवित्र होना अधिक आवश्यक है।
समाज राष्ट्र में घट रही चरित्र हनन की दु:खद घटनाओं के पीछे यद्यपि पश्चिमी आंधी का दोष है परंतु इसमें बहुत बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की भी है। ईश्वर की संध्या उपासना करना, यज्ञ करना, वेदों का स्वाध्याय करना क्या हम अपनी संतान की दिनचर्या में सम्मिलित नहीं कर सकते।
नई पीढ़ी घंटो तक मोबाइल आदि में समय बरबाद कर सकती है तो क्या 15-20 मिनिट के लिये ध्यान योग प्राणायाम नहीं कर सकती ।
  जैसे हम अंग्रेजी, गणित, केमिस्ट्री, फिजिक्स की ट्यूशन लगाते हैं, ऐसे ही क्या अपने घरों में आर्य विद्वानों को आमंत्रित कर उनसे वेदों की शिक्षाओं की ट्यूशन नहीं दिला सकते।
कैसी मशाले ले के चले थे आंधियों में हम । कि हमारी रोशनी भी हम पर सलामत नहीं रही ।
अन्य विधर्मी तो इस बारे में बिल्कुल सजग रहते हैं हिंदू जाति इसमें क्यों रुचि नहीं लेती है ?
इसके पूर्व बिजनौर उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक पंडित भीष्म आर्य ने मधुर भजनों के माध्यम से मां पिता को संतान निर्माण के सूत्र प्रदान किए।
प्रतिदिन दोनों समय सनातद धर्मी श्रद्धालुओं के द्वारा श्रोताओं के लिये अल्पाहार की व्यवस्था की गई है । दोपहर में प्रतिदिन किसी शिक्षा केन्द्र में जाने के क्रम में स्टार पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिये आचार्य श्री का विशेष उद्बोधन हुआ। बच्चों ने उत्साह पूर्वक न केवल उपदेश सुना अपितु प्रश्न पूछकर समाधान भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माता-बहने एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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