मरीह माता मंदिर में-दुर्गाष्टमी पर दरबार में हवन में दुर्लभ औषधियां, जड़ी-बूटियां से किया जाएगा हवन


सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के विश्रामघाट स्थित मरीह माता मंदिर में आस्था और उत्साह के साथ पर्व मनाया जा रहा है। बुधवार को नवरात्रि के चौथे दिवस कूष्माण्डा मां की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। वहीं दुर्गाष्टमी पर सुबह 101 से अधिक दुर्लभ औषधियां, जड़ी-बूटियां से हवन और रात्रि बारह बजे महानिशा आरती का आयोजन किया जाएगा। महाष्टमी और नवमी को भव्य कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां जारी है।

संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि हर साल प्रत्येक नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्गाष्टमी पर औषधियां, जड़ी-बूटियां से हवन किया जाता है, इसके अलावा रात्रि को महानिशा आरती की जाती है। सर्वमनोकामना सिद्धि के लिए औषधि हवन का आयोजन किया जाएगा। अनुष्ठान में उपयोग होने वाली दुर्लभ औषधियां और जड़ी-बूटियां न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगी, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेंगी। दरबार में हवन में 101 से अधिक दुर्लभ औषधियां, जड़ी-बूटियां और शुद्ध घी का उपयोग किया जाएगा। इस धूनी से वातावरण शुद्ध होगा और कई समस्याओं में लाभ मिलेगा।शास्त्रों में वर्णित है कि नवरात्र में किए गए हवन से शारीरिक और मानसिक शांति प्राप्त होती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से हवन की धूनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। हवन से वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्व नष्ट होते हैं और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के चतुर्थ दिन शक्ति कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। देवी कुष्मांडा कुंडली में नीच के बुध को नियंत्रित करती हैं तथा अनाहत चक्र को नियंत्रित करती है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय होने के कारण भी इनका नाम कूष्मांडा पड़ा, देवी कुष्मांडा की पूजा अर्चना करके नौकरी व्यापार तथा नाक कान गले से संबंधित बीमारियां दूर होती है। देवी कुष्मांडा की विशेष पूजा से वाणी प्रभावित होती है और आपकी वाणी द्वारा कार्य सिद्ध होता है।


Post a Comment

0 Comments