सीहोर/शाजापुर। विद्युत मंडल की कथित लापरवाही और झूलती बिजली लाइनों की समस्या को लेकर सीहोर एवं शाजापुर जिले के किसानों का पार्वती नदी में तीसरे दिन भी जल सत्याग्रह जारी रहा। किसानों ने गहरे पानी में भैंसों को खड़ा कर उनके आगे नारे लगाते हुए कहा—“सरकार हमारी आवाज नहीं सुन रही, अब भैंसों के आगे अपनी आवाज सुना रहे हैं।”
किसानों का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और घरों के ऊपर 11 केवी एवं एलटी बिजली लाइनें झूल रही हैं, जिससे करंट की चपेट में आकर किसान घायल हुए हैं तथा कई स्थानों पर पशुओं की मौत भी हुई है। वहीं ग्रामीण उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल आने की शिकायत भी किसानों ने उठाई है।
किसानों ने विद्युत मंडल सीहोर के अधीक्षण यंत्री के कार्यपालन यंत्री के सहायक यंत्री श्यामपुर पर मुकदमा कायम करने एफ आई आर करने की मांग को लेकर किया जा रहा जल सत्याग्रह
किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में सीहोर जिले के 25 से अधिक गांवों तथा शाजापुर जिले के कुछ गांवों के 500 से अधिक किसान पिछले करीब दो माह से अलग-अलग तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, विद्युत मंडल के अधिकारियों, मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी प्रमुख मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों की मुख्य मांग है कि झूलती विद्युत लाइनों से हुई मौतों, चोटों और पशुहानि के लिए जिम्मेदार विद्युत मंडल के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज नहीं होता और उन्हें न्याय नहीं मिलता, जल सत्याग्रह एवं आंदोलन जारी रहेगा। पार्वती नदी में गहरे पानी के बीच चल रहा यह आंदोलन शासन-प्रशासन के लिए किसानों की समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग कर रहा

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