सीहोर पयूर्षण महापर्व पर धार्मिक अनुष्ठान भक्ति भाव हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है साथ ही संध्या को श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर मे जिनवाणी महिला मंडल के तत्वाधान मे सांस्कृतिक कार्यक्रम, जैन धर्म पर आधारित प्रेरणादायक शानदार नृत्य नाटिका मां की ममता एवं पूजा का फल की मनमोहक सराहनीय प्रस्तुतीकरण पर श्रध्दालुओ ने तालियो की आवाज से परिसर को गुंजायमान कर दिया ।
जिनवाणी महिला मंडला नृत्य नाटिका कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती जैन ने बताया कि मां की ममता एवं* पूजा का फल * नाटिका प्रस्तुत की गई हैं.। जिसमें धनंजय सेठ के बारे में बताया गया की जिनकी पूजा और श्रध्दान विषापहार स्तोत्र से उनके बेटे की जान सर्प देश से बच गई - एवं उनकी नास्तिक धर्म पत्नी भी धर्म पर विश्वास करने लगी पत्नी और विश्वास से पूजा के करने लगी। पूजा का फल अपरमपार है।
पूजा का फल जिसके रचियता जैन धर्म में महाकवि धनंजय सेठ जिन्होंने सुप्रसिद्ध विषापहार स्तोत्र की रचना की थी के जीवन से जुड़ा "पूजा का फल" और उनकी अटूट निष्ठा का प्रसंग अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायी जैन ग्रंथों के अनुसार, जब जीव सच्चे निष्काम भाव से भगवान की अष्टद्रव्य से पूजा करता है, तो उसका पुण्य और आत्मिक बल इतना बढ़ जाता है कि असाध्य संकट भी दूर हो जाते हैं। महाकवि धनंजय के जीवन की यह घटना 'पूजा के फल' को प्रत्यक्ष प्रमाणित करती है ।

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