सीहोर। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। इस बार अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी व वृषभ राशि का चन्द्रमा का दुर्लभ संयोग रहेगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव शुक्रवार 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में बड़े ही धूमधाम व हर्षोउल्लास मनाया जायेगा।जिले भर के भगवान लक्ष्मीनारायण व श्रीकृष्ण मंदिर में कन्हैयाजी का अभिषेक, श्रृंगार भजनकीर्तन सहित आरती की जायेंगी। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान की पूजाअर्चना करने से मनुष्य क तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। और मनुष्य जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर बैकुंठ धाम में निवास करता है l . ऐसे मनाए भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी-
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार जन्माष्टमी पर्व पर प्रत्येक सनातन धर्मी को प्रातःकाल व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूरे दिन उपवास रखते हुए श्रीकृष्ण उत्सव की तैयारियां करनी चाहिए। जन्माष्टमी पर्व पर घर के मुख्य द्वार पर बंधन बार पुष्प आदि से पूजा स्थान को सुसज्जित करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत, नैवेद्य मक्खन ,मिश्री, पंजीरी, तुलसीदल, तथा ऋतु फल भेंट करना चाहिए । भगवान के भजन, उनके चरित्रों का पाठ, गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम आदि के पठन एवं श्रवण करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि को हुआ था अतः मध्य रात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन करना चाहिए। बाल गोपाल की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए तथा यथासंभव पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। श्रीकृष्ण की बाल प्रतिमा को वस्त्र, यज्ञोपवित, चंदन, इत्र, पुष्प माला, धूप, मक्खन मिश्री एवं पंजीरी का नैवेद्य, ऋतु फल, पान का बीड़ा तथा दक्षिणा समर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की कपूर या शुद्ध घी से आरती की जानी चाहिए। तदोपरांत प्रदक्षिणा करते हुए यथासंभव गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाना चाहिए। भगवान को बांसुरी, मोर पंख, पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय है इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर यह वस्तुएं भगवान को भेंट करना चाहिए l

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