विकास केवल कागजों में, धरातल पर नहीं ’’ ‘’सी.सी. रोड़ कागजों में, धरातल पर अभी कीचड़ से परेशान ग्रामीण ’’ ‘’कागजों पर बनी सड़कें, कीचड़ में चलती जिंदगी ’’ ‘’ सीहोर के रामपुरा में लाखों के सड़क घोटाले की आशंका, पंचायत दर्पण पोर्टल एवं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल ने खोली पोल ’’


भोपाल /सीहोर। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन सीहोर जिले इछावर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कल्याणपुरा धाकड़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम रामपुरा की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां ग्रामीण आज भी बरसात में कीचड़, जलभराव और बदहाल रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम में जिन सीसी सड़कों के निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, वे आज भी धरातल पर मौजूद नहीं हैं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह जिला प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह जिला है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर 4 से 5 सालों से हो रहे कथित घोटालों पर जिम्मेदार अधिकारियों जिला प्रशासन की नजर इस कथित घोटाले पर क्यों नहीं पड़ी?


पोर्टलो पर दर्ज है निर्माण, लेकिन जमीन पर नहीं सड़क:


ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के द्वारा जो ग्राम की मुख्य सड़क जोकि मोहन पर्वत के मकान से शमशान घाट तक जाती है जिसका निर्माण पूर्व में ही प्राथमिकता के तौर पर हो जाना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्यवश जिसकी शिकायत लगातार 2022 से की जा रही है उसको निर्माण आज दिनांक नहीं कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शमशान घाट की ओर जाने वाली सड़क जो गांव के मुख्य सड़क है श्मशान घाट के पास एक आध्यात्मिक अलौकिक अद्भुत भव्यता का केंद्र बाबा रामपीर/ बाबा रामदेव जी का "दिव्या दरबार" लगता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ता है। बाबा में अटूट विश्वास के कारण मध्य प्रदेश व राजस्थान ही नहीं बल्कि समूचे भारत के अनेक दूर दराज स्थान से अपर संख्या में दर्शन हेतु श्रद्धालु आते हैं। लेकिन गर्मियों हो या बरसात हर समय कीचड़ जलभराव जैसी अनेक समस्या के बीच आवागमन करना पड़ता है, यदि गांव में वर्षा ऋतु में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो श्मशान घाट तक उसकी शव यात्रा को कमर कमर पानी ले जाने को ग्रामीणों मजबूर है। ग्रामीणों के द्वारा इसकी शिकायत वर्ष 2022 से लगभग 4 से 5 सालों से लगातार सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई में की जा रही है लेकिन स्थानीय प्रशासन व जिला प्रशासन के द्वारा ग्राम रामपुरा की जनता की समस्या को आज दिनांक तक अनदेखा किया है। ग्राम के कुछ शिक्षित लोगो ने बताया कि ग्राम पंचायत के द्वारा वर्ष 2022 में RTI के तहत यहां जानकारी प्रदान की गई थी कि ग्राम रामपुरा की पंचायत सिराडी में पंचायत के खाते में शासन की 25 लाख रूपये की राशि थी लेकिन फिर ग्राम पंचायत सिराडी से पृथक कर ग्राम पंचायत कल्याणपुरा धाकड़ का बनी उस समय फिर दोनों पंचायतों ने 25 लाख रुपए की शासन की राशि को आपस में 12 लाख रुपये की राशि जनपद पंचायत के माध्यम से दोनों पंचायतों में बराबर के ली एक पंचायत के खाते में 12 लाख की राशि आई थी लेकिन वर्ष 2022 से ग्राम पंचायत के पास में शासन की पर्याप्त राशि होने व ग्रामीणों के आवेदन/शिकायत पर आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई हैं फिर ग्राम पंचायत के द्वारा अलग से 15 वित्त आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में ग्राम रामपुरा की मोहन पर्वत के मकान से देवकरण मालवीय के मकान तक स्वीकृत की जिसका एक्टिविटी कोड 45851478, स्वीकृत राशि 1 लाख है । जिसकी जानकारी भारत सरकार के ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित है। ग्राम पंचायत के पास में 12 लाख की पहले की राशि और 15 वें वित्तीय आयोग अतर्गत 1 लाख रूपये की नई रोड स्वीकृत की गई जिसका जानकारी भारत सरकार के पंचायत दर्पण पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित है।

और पोर्टल पर ग्राम पंचायत के द्वारा कई सड़क निर्माण कार्य पूर्ण प्रदर्शित हो रहे और उनकी राशि भी आहरित कर ली गई, जबकि मौके पर सड़कें बनी ही नहीं।


सूत्रों के अनुसार जो निर्माण कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए उनमें, 1. मोहन पर्वत के मकान से श्मशान घाट तक ( प्रशासनिक स्वीकृति आदेश क्र./602/दिनांक 14/03/2017 स्वीकृत राशि 8 लाख रूपये) इसका निर्माण श्मशान घाट तक होना था वो निर्माण भी पंचायत द्वारा नहीं कराया गया था।

2. मोहन पर्वत के मकान से देवकरण मालवीय तक। ( 15 वें वित्तीय आयोग अतर्गत स्वीकृत आदेश क्र. 45851478, स्वीकृत राशि 1 लाख रूपये, वित्तीय वर्ष 2021-22) से स्वीकृत है।


3. सी. सी रोड़ निर्माण पुलिया से घिरनी वाली कुंडी तक ( एक्टिविटी कोड़ - 100022304)


4. प्रेम नारायण टेलर के मकान से चौकीदार के मकान तक सीसी सड़क (वर्क आईडी 101317657)।

5. प्रेम नारायण टेलर के मकान से सुरेश पुरी के मकान तक सीसी रोड़ ( एक्टिविटी कोड़ - 45851409)।

6.अमरपुरी के मकान से बिशनखेड़ी के काकड़ तक ग्रेवल सड़क ( एक्टिविटी कोड़ - 45852783)। और अन्य सड़क भी है।


ग्रामीणों का दावा है कि सभी का निर्माण केवल कागज़ों पर है और अधिकांश सड़कें का निर्माण हुआ ही नही और एक ही सड़क को अलग-अलग नामों से दो से तीन बार दर्शाकर भुगतान निकाल लिया गया।


फोटो किसी और सड़क की, भुगतान किसी और सड़क का:


मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि पंचायत ने निर्माण कार्यों के सत्यापन के लिए दूसरे स्थानों की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड कर दीं और उसी आधार पर भुगतान भी प्राप्त कर लिया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के साथ धोखाधड़ी का मामला भी हो सकता है।


बरसात में श्मशान तक जाने का रास्ता भी नहीं:


रामपुरा गांव की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। ग्राम की मुख्य सड़क जो श्मशान की ओर जाती मोहन पर्वत के मकान से श्मशान घाट तक बारिश के दौरान ये सड़क नाले में तब्दील हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए शव को कमर तक पानी में लेकर श्मशान घाट तक जाना पड़ता है। विकास के दावों के बीच यह तस्वीर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी की घोषणा के अनुरूप और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में दिनांक 09/08/2025 को आयोजित विभागीय बैठक में यहां महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किये थे कि वर्ष 2026 तक प्रदेश के सभी श्मशान घाट को गांव के मुख्य मार्ग से सी. सी. रोड के माध्यम से जोड़ा जाए।


2022 से हो रही शिकायतें, कार्रवाई शून्य:


स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022 से लेकर अब तक जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और अन्य सक्षम अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक किसी प्रकार की प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत दर्पण पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सड़क निर्माण पूर्ण दर्शाया गया है, तो मौके पर सड़कें कहां हैं?

यदि सड़कें बनीं, तो उनका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया। एक ही सड़क को दो से तीन बार दिखाकर सरकारी राशि निकाली गई, इसके लिए जिन लोगों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा निर्माण की तस्वीरें किस आधार पर स्वीकृत की गईं तथा

वर्षों से शिकायतों के बावजूद जांच क्यों नहीं हुई।


ग्रामीणों ने पूरे मामले की राज्य स्तरीय एवं उच्च स्तरीय जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा स्वतंत्र तकनीकी जांच, वित्तीय ऑडिट की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पंचायत दर्पण और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के रिकॉर्ड और धरातल पर मुख्य मार्ग से शमशान घाट तक और अन्य सड़कों की मौके निरीक्षण किया जाए। भारत सरकार के ई ग्राम स्वराज पोर्टल और पंचायत दर्पण पोर्टल स्वीकृत सड़को और ग्रामीण के द्वारा सीएम हेल्पलाइन ,जनसुनवाई इत्यादि में की गई शिकायतों की वास्तविक स्थिति व का मिलान कराया जाए तो कथित लाखों रुपए की सड़क घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।


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