सीहोर। शासकीय माध्यमिक शाला कौड़ियाछीतू में विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना द्वारा “शिक्षा की दीवार” नाम से अभिनव शैक्षिक पहल शुरू की गई है। इस नवाचार का मूल उद्देश्य है—“पहले देखो, फिर समझो और फिर सीखो।”
इस नवाचार को प्रारंभ करने से पूर्व प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना ने विद्यालय के शिक्षक साथियों शैलेंद्र सिंह, देवेंद्र चौहान, देवकरण मालवीय, शशिकला पांडे, फूलवती सेन, माधुरी जोशी एवं शशिवाला नामदेव के साथ बैठक कर विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं की दीवारों को ज्ञानवर्धक एवं आकर्षक बनाने पर चर्चा की।
बैठक में विद्यालय में उपलब्ध 120 से अधिक शैक्षिक चार्टों में से विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं आकर्षक दो दर्जन से अधिक चार्टों का चयन कर उन्हें कक्षाओं की दीवारों पर प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया।
शिक्षा की दीवार पर सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी सीखने के सरल तरीके, विभिन्न विषयों के महत्वपूर्ण पाठ एवं अन्य उपयोगी शैक्षिक सामग्री प्रदर्शित की गई है। इसके साथ ही बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने वाली जानकारी भी आकर्षक ढंग से प्रदर्शित की गई है।
विद्यालय की दीवारों पर प्रदर्शित यह शैक्षिक सामग्री विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बच्चे कक्षा के दौरान एवं अवकाश के समय इन चार्टों को देखकर नई जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनमें देखकर सीखने, समझने और जिज्ञासा के साथ ज्ञान अर्जित करने की प्रवृत्ति विकसित हो रही है।
प्रधानाध्यापक संजय सक्सेना ने बताया कि इस नवाचार का उद्देश्य विद्यालय के वातावरण को ऐसा बनाना है, जहां विद्यालय की प्रत्येक दीवार बच्चों को कुछ नया सिखाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए दृश्य एवं व्यवहारिक माध्यमों से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
विद्यालय स्टाफ ने इस नवाचार को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में उपयोगी पहल बताते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाने की बात कही।
“शिक्षा की दीवार—देखो, समझो और सीखो”
शासकीय माध्यमिक शाला कौड़ियाछीतू की यह पहल विद्यालय में नवाचार आधारित शिक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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