सीहोर। कभी शहर की धड़कन और बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहा सुंदर वन पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रविवार को जब 'सीवन टीम' सुंदर वन परिसर पहुंची, तो वहां मौजूद बच्चों के मासूम लेकिन तीखे सवालों ने प्रशासन और व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया।
बच्चों ने सीधा सवाल पूछा—"36 वर्षों में कहां खो गया हमारा सुंदर वन? और इसकी वापसी कब होगी?"अतीत का गौरव: जहां मचान था और मगरमच्छ तैरते थे,नौकायन होती थी, झूलें फिसल पट्टी,फूल एवं ओषधि दार पौधें, विभिन्न प्रकार के पशु एवं पंछी थे,बैठने की व्यवस्था थी साथ सीवन नदी के ऊपर आने जाने हेतु लकड़ी के पुल था जो आकर्षण का केंद्र था ।
,सीवन टीम ने वहां मौजूद नई पीढ़ी के बच्चों को सुंदर वन के सुनहरे इतिहास से रूबरू कराया। टीम ने बताया कि करीब साढ़े तीन दशक पहले यह जगह इतनी जीवंत थी कि लोग दूर-दूर से यहां वक्त बिताने आते थे:वर्तमान की हकीकत: खंडहर में तब्दील हुआ बचपन 36 वर्षों के लंबे अंतराल और प्रशासनिक अनदेखी के कारण आज यह पूरा परिसर उजाड़ हो चुका है। न तो वे झूले बचे हैं और न ही पक्षियों की चहचहाहट। जलाशय सूख चुके हैं और मचान का अस्तित्व मिट चुका है। बच्चों ने जब इस गौरवशाली अतीत के बारे में सुना, तो उनकी आंखें चमक उठीं और उन्होंने जिम्मेदारों से पूछा कि आखिर उनकी पीढ़ी को इस मनोरंजन और हरियाली से दूर क्यों रखा गया। कब जागेगा प्रशासन?
सीवन टीम के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सुंदर वन के जीर्णोद्धार की मांग को दोबारा जिंदा करना है। स्थानीय नागरिकों और बच्चों की अब एक ही पुकार है कि प्रशासन अपनी नींद से जागे, बजट स्वीकृत करे और सुंदर वन को उसका पुराना स्वरूप लौटाए ताकि सीहोर के बच्चों को फिर से अपना खोया हुआ बचपन और पर्यटन स्थल वापस मिल सके ।
सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने कहा कि सुंदर वन बच्चों की मस्ती और हर आदमी का सुकून था 1990 में हुआ था इस सुंदर वन का उद्घाटन लेकिन समय के साथ सब उजड़ गया बचा तो केवल पॉलीथिन,कचरा,शराब की बोतल,सिगरेट के पैकेट के अलावा कुछ नहीं बचाव। उन्होंने बचाया कि यदि इसे विकसित किया जाता है तो सीहोर के इतिहास में पर्यटन के रूप में मील का पत्थर साबित होगा । और जिस तरह से सीवन पुत्र टीम सीवन उद्धार को लेकर संकल्पित है उसी तरह से सुंदर वन को लेकर भी संकल्पित है ।
सीवन पुत्र कैलाश चव्हाण ने बच्चों और बड़ों को जो अपरिचित थे सुंदर वन से उनको बताया कि कहां क्या था,उन्होंने बचपन की यादों को ताजा कर दिया ।
भोपाल से आए गुना के अमित ने बताया कि 15 साल पहले की दशा कुछ और थी लेकिन अब ये उजड़ चुका है । आम नागरिक शेखर राय ने बताया कि इस उजड़े वन को देखकर बड़ा दुख होता है लेकिन किसी को इसकी फ़िक्र नहीं है ।
सुरेश भगत ने कहा कि इस सुंदर वन की दुर्गति को लेकर प्रशासन एवं आम लोगों की अनदेखी रही यदि यह विकसित रहता तो आज इसमें शेर, चीता,बाघ आदि देखने को मिलते ।
लक्ष्मण चौकसे एवं योगेंद्र राय ने इस सुंदर वन को विकसित करने हेतु शासन,प्रशासन,नगर पालिका से निवेदन किया ।
इस अवसर पर सीवन पुत्र सुरेश भगत,कैलाश चव्हाण,प्रकाश यादव,मुकेश राय,लक्ष्मण चौकसे, योगेंद्र राय,अथर्व चावड़ा,नितिन मालवीय,वैभव राठौर,सुधीर सोनी,शेखर राय आदि उपस्थित थे ।


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