चांदबढ़ गौपाल गौशाला में कथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब, संत कमल किशोर नागर ने बताया राम नाम और माता-पिता की सेवा का महत्व


सीहोर। चांदबढ़ गौपाल गौशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मालवा के प्रसिद्ध संत ने श्रद्धालुओं पर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की अमृतवर्षा की। कथा पंडाल में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे और गौशाला परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आया।

कथावाचन के दौरान संत श्री नागर ने भगवान के नाम-स्मरण का महत्व बताते हुए कहा कि पर्व, संक्रांति, सूर्य या चंद्र ग्रहण तथा पवित्र अवसरों पर किया गया जप-तप और उपवास मनुष्य के पापों का प्रायश्चित करता है तथा आत्मा और शरीर को शुद्ध बनाता है। उन्होंने कहा कि जैसे अशुद्धता के बाद हाथ धोने से शरीर शुद्ध होता है, वैसे ही कथा, सत्संग और धार्मिक आयोजनों में शामिल होने से आत्मा का शुद्धिकरण होता है।

माता-पिता की सेवा पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि जिन माता-पिता ने बच्चों को बचपन में स्नेह और संरक्षण दिया, उनके अंतिम समय में संतान को भी उनके साथ उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पुत्र अत्यंत भाग्यशाली होता है जिसकी गोद में माता-पिता अपने अंतिम प्राण त्यागते हैं।

संत श्री नागर ने आधुनिक जीवनशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोग बड़े-बड़े मकानों में भव्य हॉल तो बनवा लेते हैं, लेकिन अपने ही माता-पिता, रिश्तेदारों और परिचितों का हाल-चाल पूछने का समय नहीं निकालते।

आज कथा के दौरान दोपहर में तेज वर्षा शुरू हो गई थी इस अवसर पर संत श्री नागर ने कहा कि जब भक्त भगवान का स्मरण करते हैं तो स्वयं जल नारायण कृपा बरसाने आ जाते हैं। वर्षा के बावजूद श्रद्धालु अपनी जगह पर डटे रहे और कथा का रसपान करते रहे।

मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए संत श्री नागर ने कहा कि आज लोग मोबाइल में अधिक व्यस्त रहते हैं जबकि मंदिरों में घंटी बजाने और भगवान का स्मरण करने का समय नहीं निकालते। नई पीढ़ी को संस्कारों का संदेश देते हुए उन्होंने चरित्र की पवित्रता, मर्यादा और धार्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

कथा के बीच प्रस्तुत सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए। वर्षा होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही और कथा का क्रम निरंतर चलता रहा।


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