प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में संत सम्मान कार्यक्रम ग्यारस पर किया जाएगा भजन संध्या और फलहारी खिचड़ी का वितरण सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है-संत माधवदास महाराज


सीहोर। सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने का संदेश दिया है। सनातन संस्कृति में सभी जीवों के प्रति प्रेम, दया और सम्मान का भाव सिखाया जाता है। आज के दौर में सभी माया के भक्त है, इसलिए भगवान पर भरोसा कम होता है जा रहा है। बच्चों में संस्कारों की कमी के कारण उनका जीवन नर्क होता जा रहा है। उक्त विचार शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर पर एक दिवसीय संत सम्मान कार्यक्रम का आयोजन को संबोधित करते हुए संत माधवदास महाराज ने कहे। इस मौके पर सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा, आयुष गुप्ता आदि ने केदरनाथ से शहर में आए साधु स्वरूपनंद गिरी का सम्मान किया।

संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने कहाकि आज के समय में व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, जिसके कारण मानसिक अशांति और तनाव बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में सनातन धर्म के आदर्श और संस्कार जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। भगवान की भक्ति, माता-पिता का सम्मान, गुरुजनों का आदर और समाज सेवा ही सच्चे धर्म के लक्षण हैं। सनातन धर्म किसी के प्रति द्वेष नहीं सिखाता, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है। धर्म का उद्देश्य लोगों को जोड़ना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। श्रद्धालुओं को नियमित पूजा-पाठ, सत्संग, दान-पुण्य एवं मानव सेवा के लिए प्रेरित किया गया।

ग्यारस पर किया जाएगा खिचड़ी प्रसादी का वितरण

आगामी 25 जून को शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर पर एक दिवसीय भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर संस्कार मंच, श्रद्धा भक्ति सेवा समिति और मंदिर के द्वारा यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं का फलहारी खिचड़ी का वितरण किया जाएगा। मंदिर में प्रत्येक ग्यारस पर भगवान नृसिंह मंदिर में भजन मंडल के द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाती है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भजन संध्या में आने की अपील की। 


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