वर्षाकाल के दृष्टिगत जर्जर मकानों को ध्वस्त करें, प्राकृतिक आपदा के दौरान आर्थिक सहायता की कार्रवाई तत्परता से करें - कलेक्टर पीने के पानी की नियमित जांच एवं नलकूपों का क्लोरीनेशन सुनिश्चित करें -कलेक्टर मूंग उपार्जन की तैयारियां समय पर पूरी करें, पंजीयन सत्यापन में न बरतें लापरवाही - कलेक्टर हितग्राहियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बैंक खातों का स्वयं करें सत्यापन - कलेक्टर

सीहोर, 29 जून, 2026    कलेक्टर श्री बालागुरू के. की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में टीएल बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने सभी विभागों के समय-सीमा वाले प्रकरणों और सीएम हेल्पलाइन में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की और समय सीमा के भीतर सभी प्रकरणों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए।

 कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय कर्मचारियों की सभी विभागीय सेवानिवृत्ति संबंधी कार्यवाही समय-सीमा में पूरी करते हुए उनके समस्त स्वत्वों एवं देयकों का भुगतान पूरी तत्परता से सुनिश्चित किया जाए। सेवानिवृत्ति से संबंधित किसी भी कार्रवाई में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। ये कर्मचारी वर्षों तक शासन की सेवा करते हैं, इसलिए उनके सम्मान और अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी स्मरण कराया कि प्रत्येक शासकीय सेवक को एक दिन सेवा से सेवानिवृत्त होना है, इसलिए इस कार्य को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्राथमिकता देते हुए समय पर पूरा करें।

  कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने टीएल बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों के बैंक खातों का सत्यापन बैंक पासबुक के आधार पर स्वयं करें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के भुगतान अथवा राशि अंतरण से पहले बैंक खाते की जानकारी का भौतिक सत्यापन किया जाए। बैंक पासबुक से सत्यापन करने पर किसी भी प्रकार की त्रुटि या गड़बड़ी की संभावना नहीं रहेगी तथा संबंधित राशि सीधे वास्तविक हितग्राही के बैंक खाते में ही अंतरित होगी। बैठक मे जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव, संयुक्त कलेक्टर श्री रविंद्र परमार, एसडीएम श्री तन्मय वर्मा, श्रीमती स्वाति मिश्रा सहित सभी विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।

संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिये जर्जर मकानों को गिराने निर्देश

  बैठक में कलेक्टर ने वर्षाकालीन आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी एसडीएम एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए चिन्हित सभी जर्जर मकानों को तत्काल गिराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनहानि रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम वाले भवनों के संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाढ़, अतिवृष्टि, प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य दुर्घटनाओं से प्रभावित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की कार्रवाई भी पूरी तत्परता से की जाए। उन्होंने कहा कि राहत प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कर पीड़ित व्यक्ति या उनके परिजनों तक समय पर सहायता राशि पहुंचाई जाए, ताकि संकट की घड़ी में उन्हें तत्काल राहत मिल सके। इसके साथ ही किसी भी जर्जर भवन में स्कूल, आंगनबाड़ी न लगाये। यदि कोई भवन जर्जर हो तो उस स्कूल, आंगनबाड़ी को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाये।

मूंग पंजीयन का सत्यापन और केन्द्रों में आवश्यक व्यवस्था के निर्देश

 कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन का सत्यापन समय-सीमा में पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। पात्र किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। कलेक्टर ने उपार्जन केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को उपज विक्रय के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त तौल कांटे, बारदाना तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।

पीने के पानी की नियमित जांच एवं नलकूपों का क्लोरीनेशन करें

 कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल निगम, सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षाकाल को देखते हुए पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। पीने के पानी की नियमित जांच कराई जाए तथा जल स्रोतों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। जिले के सभी नलकूपों का समय.समय पर क्लोरीनेशन कराया जाए ताकि जल जनित बीमारियों की रोकथाम हो सके और नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पेयजल संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण करें तथा किसी भी क्षेत्र में दूषित जल की स्थिति उत्पन्न न होने दें।

रैन बसेरों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

 कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने जिले के सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के सभी रैन बसेरों में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। रैन बसेरों में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की नियमित व्यवस्था बनाए रखी जाए, ताकि वहां ठहरने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि रैन बसेरों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा जहां भी किसी प्रकार की कमी या अव्यवस्था हो, उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आमजन की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी रैन बसेरे सुव्यवस्थित एवं उपयोग के लिए सदैव तैयार रहें।

अन्य निर्देश

  टीएल बैठक में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में किसानों की आवश्यकता के अनुसार खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा खाद का वितरण ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से व्यवस्थित ढंग से किया जाए। किसी भी किसान को खाद प्राप्त करने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुचारु रहे। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में किसानों की मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने संबंधित अधिकारियों को वनाधिकार पट्टों के फौती नामांतरण तथा वन ग्रामों के राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तन की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए।

  कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय कार्यालयों एवं भवनों के निर्माण के लिए वास्तव में जितनी भूमि की आवश्यकता हो, उतनी ही भूमि आवंटन का प्रस्ताव भेजा जाए। उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता के अधिक भूमि की मांग करने से बचें और भूमि का उपयोग व्यावहारिक आवश्यकता के अनुरूप ही सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने कहा कि आवश्यकता से अधिक भूमि आवंटित होने पर उसकी समुचित देखरेख नहीं हो पाती, जिससे उस पर अतिक्रमण की स्थिति उत्पन्न होने लगती 

 



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