पुत्र अभियान राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना यह अभियान देश की प्रमुख नदियों को मूल स्वरूप में एवं स्वच्छता का कायम करने में हो रहा है सहायक । 5 हजार सीवन पुत्र एवं पुत्री बनने के बाद लक्ष्य रखा 10 हजार साथ ही देश की प्रमुख नदियों के नाम से बन रहे हैं पुत्र एवं पुत्री


वर्ष 2015 से शुरू हुआ 'सीवन जन आंदोलन' वर्ष 2026 में एक विराट जन अभियान का रूप ले चुका है। इस वर्ष आंदोलन ने 5000 'सीवन पुत्र एवं सीवन पुत्री' बनाने का महा-लक्ष्य निर्धारित किया है। धीरे-धीरे इस मुहिम से जन-जन जुड़ता गया और यह सीहोर की जीवनदायिनी सीवन नदी के पुनरुद्धार का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है।


सीवन पुत्र एवं पुत्री के बनने के पीछे मूल भावना

सिवान पुत्र एवं पुत्री बनने के पीछे मूल उद्देश्य है कि नदी एवं प्रकृति से भावनात्मक रिश्ते बनाना, जब मन जैसा रिश्ता नदी एवं प्रकृति से बन जाता है तो कोई भी उसे स स्वच्छ नहीं करेगा, न ही कचरा एवं पूजन सामग्री डालेगा । इसी मूल भावना को लेकर पूरे देश की नदियों के नाम से पुत्र एवं पुत्री बन रहे हैं ।


नदी की दुर्दशा और अभियान का मुख्य उद्देश्य

अभियान के बारे में जानकारी देते हुए प्रदीप चावड़ा ने बताया कि इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य नदियों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाना, उनका पूर्ण जीर्णोद्धार करना और जल को पूरी तरह स्वच्छ बनाना है। उन्होंने सीवन नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सीवेज और गंदे नालों का पानी सीधे नदी में मिलने के कारण सीवन का जल अत्यधिक दूषित हो चुका है। स्थिति यह है कि इस पानी का उपयोग न तो घरेलू कार्यों में किया जा सकता है और न ही इसे भगवान पर अभिषेक के लिए चढ़ाया जा सकता है। इसी दुर्दशा को बदलने के लिए यह महा-अभियान चलाया जा रहा है।


संकल्प से शुरुआत और कड़े संघर्ष की गाथा :

इस महाभियान की शुरुआत 'संकल्प महोत्सव' से हुई,जहाँ 1008 संत श्री हरिराम दास जी महाराज ने उपस्थित जनसमूह को नदी संरक्षण का संकल्प दिलाया। इसके बाद सीवन योद्धाओं ने पीछे मुड़कर नहीं देखा,देखते ही देखते जो पांच हजार सीवन पुत्र एवं पुत्री बनाने का लक्ष्य लिया था वह पूर्ण हुआ और पूर्ण करने पर दीप महोत्सव एवं सम्मान समारोह रखा गया, सीहोर शहर के प्रसिद्ध श्री मनकामेश्वर मंदिर पर दीपों को जलाया गया एवं योगाचार्य, समाजसेवी एवं पूर्व रिटायर्ड सैनिकों का सम्मान हुआ ।


:हनुमान फाटक अभियान: तीन जलाशयों को सीवन योद्धाओं द्वारा बनाना

जहाँ एक बूंद पानी नहीं था,उन जगहों पर 45 डिग्री के भीषण तापमान में योद्धाओं ने जज्बा दिखाते हुए जलकुंभी को उखाड़ फेंका एवं तीन जलाशयों का निर्माण हुआ जहां पर करोड़ जीव-जंतु पशु पक्षियों ने भीषण गर्मी में अपनी प्यास बुझाई ।


महिला घाट उद्धार:

महिला घाट पर लगातार 12 दिनों तक स्वच्छता अभियान चलाकर गंदगी और दूषित सामग्रियों को निकाला गया।


छतरी घाट पर श्रमदान एवं जलाशय का बनना:

छतरी घाट कस्बा सीहोर पर सिवान योद्धाओं की टीम उतारी और श्रमदान करने हेतु सीहोर की सामाजिक संस्थाएं एवं पूर्व रिटायर्ड सैनिकों की टीम ने मोर्चा संभाला साथ ही साथ सीवन योद्धाओं ने यहां पर जीव जंतु पशु पक्षियों के लिए जलाशय बनाया क्योंकि यहां पर भी जल पूर्ण रूप से जलकुंभी से दबा हुआ था ।


घाटों का कायाकल्प:

योद्धाओं ने हाथी घाट, पुरुष घाट,बैगन घाट,खत्री घाट,छतरी घाट (जहाँ जलाशय बने), वाल्मीकि घाट आदि पर लगातार स्वच्छता का कार्यक्रम चलाया ।


खत्री घाट की मुक्ति:

खत्री घाट स्थित शिव मंदिर को गंदगी से मुक्त कराकर पूरे घाट परिसर को स्वच्छ और सुंदर बनाया गया।

सुंदर वन जो वर्तमान में पूर्ण रूप से उजड़ चुका है

सुंदरवन जो सीहोर की शान कहलाता था 1990 में इस सुंदरबन का उद्घाटन हुआ उसे समय यह पूर्ण रूप से हरा भरा और आबाद था बड़े बढ़ के पेड़ पर मचान,झूले, फिसल पट्टी नौकायन ,विभिन्न प्रजातियों के पशु-पक्षी ,फूलदार पौधे, औषधि वाले पौधे,बैठने के लिए बैंच आदि सभी थे किंतु 2026 आते-आते उजड़ा वन के रूप में तब्दील हो गया । वर्तमान में दारू की बोतल, पॉलिथीन आदि सामग्रियों से भरा पड़ा हुआ सुंदरवन को जीवन पुत्रों ने गोद लिया और यहां की स्वच्छता हेतु अभियान चलाया जिसके तहत पूर्ण रूप से कचरा साफ करके प्रशासन से अपील की कि सुंदरवन को सुंदर बनाने की मुहीम में आगे आए व पहले जैसा सुंदरवन को बना दिया जाए ताकि सीहोर की सुंदरता में चार चांद लग जाए व पर्यटन स्थल के रूप में यह सुंदरवन दिखाई देने लगे ।


कर्मठ साथियों और योद्धाओं का अद्वितीय जज्बा :

इस अभियान को गति देने में शहर के अनेक जागरूक नागरिक दिन-रात जुटे हुए हैं। अभियान में कर्मठ एवं सक्रिय 'सीवन पुत्र' के रूप में प्रदीप चावड़ा,मुकेश राय, प्रकाश यादव और वैभव राठौर,कनीराम मालवीय,जगदीश वर्मा,राजकुमार सोनी,सुरेश भगत,अशोक नामदेव,हरीश आर्य,ब्रजेश पाराशर,विल्सन जैन,नितेश जायसवाल,उमेश चावड़ा,रवि महेश्वरी,देवेश सिसोदिया,अथर्व चावड़ा सीवन पुत्री के रूप में ज्योति चावड़ा, सुनीता सोनी,अलका कुशवाह,कनक परमार,प्रति सोनी, सोनिया सोनी,मधु राठौर,टीना चव्हाण,सीमा शर्मा आदि सक्रिय रहकर नदियों के मूल स्वरूप एवं उद्घार हेतु काम कर रही हैं


आदि जुड़े हैं, जिन्होंने धरातल पर अपना अद्भुत जज्बा दिखाया है। वहीं, अग्रिम पंक्ति के 'सीवन योद्धा' के रूप में कमल नाविक, श्याम नाविक, राधेश्याम,सचिन प्रजापत और वैभव बाथम आदि लगातार अपनी सक्रिय सेवाएं देकर नदी की स्वच्छता में योगदान दे रहे हैं।


जन-जागरूकता के अनोखे प्रयास आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कई रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए:


मेरी सीवन मेरे शब्द:

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने कविताओं और लेखों के माध्यम से नदी की दशा और दर्द को अपने शब्दों में बयां किया।

सीवन वाहन रैली:

शहर में विशाल वाहन रैली निकालकर नागरिकों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।


महिला सम्मान समारोह:

समाज में योगदान देने वाली महिलाओं, पूर्व आर्मी जवानों और सफाई कर्मियों का भव्य स्वागत व सम्मान किया गया।


पूर्व आर्मी सैनिकों का सम्मान

सीवन पुत्र की टीम ने पूर्व सैनिकों का सम्मान किया सभी को सीवन मेडल देकर देश सेवा के लिए सम्मानित किया ।

वृद्ध सम्मान


हनुमान फाटक धाम पर दो का विशेष सम्मान किया गया शिवम पुत्र की टीम ने उन्हें सम्मान के रूप में उनके गले माला एवं दुपट्टे डाले ।


दीप महोत्सव

देशव्यापी विस्तार नदी के प्रति आस्था जगाने के लिए दीप महोत्सव महिला घाट पर आयोजित हुआ जिसमें घाटों पर एवं नदी के अंदर दीपों को जलाया, कार्यक्रम में ही सीवन रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, देशभक्ति एवं भजनों की प्रस्तुति हुई,प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया गया ।


आध्यात्मिक और पर्यावरण-हितैषी कदम उठाए गए:


18 किमी सीवन परिक्रमा: संत श्री हरिराम दास जी महाराज द्वारा पोस्टर विमोचन के बाद श्रद्धालुओं ने 18 किलोमीटर की सीवन परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण की।


5000 सीवन पुत्र एवं पुत्री बनने पर दीप महोत्सव:

श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर, सीहोर पर भव्य दीप महोत्सव का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर योगाचार्य,समाजसेवी एवं पूर्व रिटायर्ड सैनिकों का हुआ सम्मान


हरित जन्मदिन:

सीवन पुत्र की टीम पौध रोपड़ का कम कर रही है जिसके तहत विभिन्न जगहों पर पौधरोपण का कार्य किया गया,जन्मदिन, पुण्यतिथि विवाह वर्षगांठ आदि अवसर पर लोगों से पौधरोपण करवाकर प्रकृति को सहेज रहे हैं।


सीवन हस्ताक्षर अभियान:


सीवन हस्ताक्षर अभियान के तहत शहर के विभिन्न चौराहों पर सीवन पुत्र की टीम ने सीवन के प्रति जागरूकता हेतु लोगों से बड़े-बड़े बेनर पर हस्ताक्षर करवाकर नदियों के प्रति भावना को प्रदर्शित किया ।



स्वच्छता अभियान

स्वच्छता अभियान के तहत जीवन पुत्र ऐसी जगह पर स्वच्छता का कार्यक्रम चल रही है जो स स्वच्छ है उन जगहों पर टीम द्वारा स्वच्छता का अभियान चलाया जाता है एवं उसी जगह पर स्वच्छता हेतु संकल्प दिलवाया जाता है ।


सीवन शपथ ग्रहण समारोह

सिवान शपथ ग्रहण समारोह के अंतर्गत सीवन पुत्र एवं पुत्री की टीम शहर के विभिन्न वार्डों में स्कूल कॉलेज कोचिंग खेल के मैदान आदि सार्वजनिक जगहों पर जाकर सीवन के प्रति एवं देश की अन्य नदियों के प्रति स्वच्छता का संकल्प दिलवाया जा रहा है ।

 10,000 सीवन पुत्र एवं पुत्री का लक्ष्य:

5000 सिवान पुत्र पुत्री के लक्ष्य को पूर्ण करने के बाद दूसरा लक्ष्य 10000 कर लिया और साथ ही साथ देश की प्रमुख नदियों के नाम से भी पुत्र और पुत्री लगातार बना रहे हैं यह अभियान देश की प्रमुख नदियों को मूल स्वरूप में लाने उनका पूर्ण उद्धार एवं स्वच्छता को कायम करने में सहायक हो रहा है


देश की प्रमुख नदियों के नाम से पुत्र एवं पुत्री बनाने का लक्ष्य:

देश की प्रमुख नदियों के नाम से पुत्र एवं पुत्री बनते चले जा रहे है,सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा का कहना है कि नदियों से भावनात्मक संबंध स्थापित होने के बाद संभव है कि लोग नदियों को स्वच्छ रखेंगे । ये अभियान अंतिम सांस का चलता रहेगा क्योंकि जल है तो जीवन है ।

यह अभियान का दायरा राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है और इस अभियान की चर्चा पूरा देश में हो रही है । प्रदीप चावड़ा ने अपील की है कि सीवन नदी के साथ-साथ अब देश की अन्य प्रमुख नदियों के नाम पर 'पुत्र एवं पुत्री' संकल्प लेकर इस पर्यावरण क्रांति का हिस्सा जरूर बने ।


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