सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में सनातन सेना और संस्कार मंच के तत्वाधान में गायत्री जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ, हवन एवं प्रवचनों का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस मौके पर मंदिर के संत माधवदास महाराज ने यहां पर आए रामलीला मंडल का स्वागत किया। इस मौके पर संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, लालू, आयुष गुप्ता आदि शामिल थे। प्रयाग राज से आए रामलीला मंडल की ओर से बृजेश शर्मा ने बताया कि आगामी दिनों में मंदिर परिसर में सभी के सहयोग से भव्य रामलीला का आयोजन लगातार 12 दिनों तक जारी रहेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं गायत्री महामंत्र के सामूहिक जप के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां देकर विश्व शांति, मानव कल्याण एवं राष्ट्र की समृद्धि की कामना की। पूरे परिसर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। मां गायत्री ज्ञान, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक चेतना की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। गायत्री मंत्र मानव जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है तथा व्यक्ति के विचारों को शुद्ध और संस्कारित बनाता है। उन्होंने कहा कि गायत्री उपासना से आत्मबल बढ़ता है और जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
आज किया जाएगा ग्यारस पर भजन संध्या का आयोजन
सनातन सेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि गुरुवार को एकादशी के पावन अवसर पर रात्रि को भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर नृसिंह मंदिर भजन मंडल के तत्वाधान में शहर सहित आस-पास के भजन गायकों के द्वारा परिसर में कीर्तन आदि किए जाऐंगे। वहीं फलहारी खिचड़ी का वितरण भी किया जाएगा। श्री दीक्षित ने कहाकि गायत्री मंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन को प्रकाशमय बनाने का दिव्य सूत्र है। इसके नियमित जप और साधना से व्यक्ति का मानसिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास होता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है। वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों और संस्कारों की आवश्यकता पहले से अधिक है। गायत्री परिवार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता, संस्कार और सेवा के अभियान समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन एवं धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अंत में प्रसाद वितरण किया गया और सभी उपस्थित जनों ने समाज में सद्भाव, सेवा और संस्कारों के प्रसार का संकल्प लिया।

0 Comments