मंदिर के समीपस्थ स्थित 70 वर्ष पुरानी जर्जर धर्मशाला दे रही है बड़े हादसे को न्यौता


सीहोर। बारिश का मौसम सिर पर है आसमान में कुछ दिन में काले बादल मंडराने लगेंगे, लेकिन सोहर प्रशासनिक अमला गहरी नींद में सोया हुआ है। नगरीय क्षेत्र के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके तहसील चौराहा के पास स्थित एक 70 वर्ष धर्मशाला इस समय मौत का साया बनी खड़ी है। यह इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी भरभराकर गिर सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यही लापरवाही रही तो कभी भी किसी निर्दोष को जान गवाना पड़ सकता है। तहसील चौराहा सीहोर का यह इलाका है जहाँ सुबह से लेकर रात तक हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग समीपस्थ प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर व तहसील और कोर्ट से जुड़े कामों के लिए इसी रास्ते से गुजरते हैं।

इसी मुख्य मार्ग के नजदीक स्थित यह जर्जर धर्मशाला अब एक खतरा बन चुकी है। इमारत

की दीवारे दरक चुकी हैं, छत का हिस्सा कभी भी नीचे गिर सकता है। आगामी बारिश के मौसम में जब तेज हवाएं और पानी इस खोखली हो चुकी इमारत पर पड़ेगा, तो इसके डहने की आशंका 100 प्रतिशत है।

इस गंभीर मुद्दे पर सीहोर के समाजसेवी विवेक राठिया ने जनता की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। कहा है कि यह सिर्फ एक जर्जर इमारत नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत हैं। रोज यहाँ से हजारों लोग गुजऱते हैं, स्कूली मासूम बच्चे निकलते हैं। अगर

बारिश के दौरान यह धर्मशाला गिरती है, तो कई परिवारों के चिराग बुझ सकते हैं। प्रशासन को तुरंत इस पर एक्शन लेना चाहिए, कागजी खानापूर्ति बंद हो। सीधे तौर पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि अगर समय रहते इस ढांचे को नहीं ढहाया गया या सुरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी हादसे की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर पालिका की होगी। श्री रूठिया ने आगे कहा कि मानसून आने में कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक इमारत को खतरनाक घोषित कर बैरिकेडिंग भी नहीं की गई है। व्यस्त कमर्शियल एरिया होने के बावजूद नपा की टीम ने मौके का मुआयना कर तुरंत एक्शन लेने की जहमत नहीं उठाई। रूठिया ने कहा कि उक्त जर्जर बिल्डिंग का कुछ हिस्सा पहले ही टूटा पड़ा है और अब पुरी बिल्डिंग किसी भी समय धराशाही हो सकती है किसी की भी मौत का करण बन सकती है, प्रशासन का ध्यान इस ओर आक्रषित कराते हुए उक्त बिल्डिंग को किसी भी खतरे से पूर्व ढहाया जावे और सुरक्षित किया जावे।


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