सीहोर। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पॉश इलाके अवधपुरी कॉलोनी में हुई 32 लाख की सनसनीखेज चोरी को आज 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर दीपक जाधव के घर को निशाना बनाने वाले शातिर चोरों का सुराग लगाने में सीहोर पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
यह मामला इसलिए भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग है क्योंकि जिस मकान में चोरी हुई, उसके तीनों ओर पुलिसकर्मियों के आवास हैं। खाकी की मौजूदगी के बावजूद चोरों ने जिस इत्मीनान से वारदात को अंजाम दिया, उसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
घटनाक्रम पर एक नजर
तारीख: 24 जून को परिवार महाराष्ट्र गया था, 27 जून को चोरी का खुलासा हुआ।
नुकसान: लगभग 32 लाख रुपये (7 लाख नकद और भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात)।
चोरी गया सामान: रानी हार (10 लाख), मंगलसूत्र, सोने की कटोरी, 20 सोने के मोती, चांदी के सिक्के और भगवान के बर्तन।
15 दिन की 'शून्य' उपलब्धि
वारदात के बाद एफएसएल (FSL) टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए थे और थाना प्रभारी रविन्द्र यादव ने जल्द खुलासे का दावा किया था। लेकिन दो सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पड़ोसियों का सवाल: "अगर पुलिसकर्मियों के पड़ोस में रहने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं और 15 दिन में पुलिस एक सुराग तक नहीं ढूंढ पाई, तो आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाए?"
खंगाले जा रहे CCTV, पर नतीजा सिफर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कॉलोनी और आसपास के रास्तों के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं और कई संदिग्धों से पूछताछ भी की गई है। हालांकि, तकनीकी साक्ष्य और जमीनी मुखबिरी के बावजूद आरोपियों का कोई ठोस लोकेशन या पहचान सामने नहीं आ पाई है।
क्या सुस्त पड़ी जांच?
अवधपुरी के रहवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि शहर के हृदय स्थल में इतनी बड़ी वारदात होने के बावजूद जांच की गति धीमी क्यों है? लाखों के जेवरात और नकदी गंवा चुका जाधव परिवार अब न्याय की उम्मीद में थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ है।
वर्तमान स्थिति: पुलिस का दावा है कि टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। 32 लाख की इस "बड़ी सेंधमारी" ने अब पुलिस प्रशासन की साख को दांव पर लगा दिया है।
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