सीहोर। जहां पर धर्म होता है वहां युद्ध नहीं होता है। धर्म के हटते ही युद्ध शुरू हो जाता है इसलिए धन से अधिक धर्म का महत्व है। बचपन में सुनी गई भगवान की कथा सत्संग छप्पन की उम्र में काम आता है। भगवान की भक्ति सरलता से नहीं अभ्यास से मिलती है उक्त उद्गार शनिवार की रात हिंगलाज माता मंदिर कस्बा में भावसार समाज महिला मंडल के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भागवत भूषण पंडित रविशंकर तिवारी के द्वारा श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किए गए।
भागवत भूषण पंडित श्री तिवारी ने भगवान की भक्ति में व्यवधान पैदा करने वाले मन रूपी बकरे को लेकर कहा कि मन को जब तक मारोगे नहीं यह भक्ति में लगेगा नहीं। संत मन को युक्ति से मारने का काम करते हैं। ऐसे संतों के समक्ष राजा महाराजा शीश झुकाते हैं। उन्होंने मान अपमान को लेकर कहा कि बिना निमंत्रण के कहीं नहीं जाना चाहिए। राजा दक्ष के महायज्ञ में सती बिना बुलाए चली गई थी उन्हें अग्नि में भस्म होना पड़ा था । पद का अभिमान और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। राजा दक्ष ने प्रजापति होने का अभिमान किया भोलेनाथ का अपमान किया। महादेव ने अभिमान को तोड़ दिया।
पंडित श्री तिवारी ने कहा कि दुर्योधन के परिवार से धर्म रूपी विदुर के हटते ही भगवान श्री कृष्णा ने महाभारत युद्ध कर दिया था। लंका में रावण के परिवार से विभीषण के हटते ही श्री राम ने रावण का सर्वनाश कर दिया था। धर्म सब की रक्षा करता है धर्म के हटते ही सब कुछ नष्ट हो जाता है।
ब्रह्मा जी के आदेश पर मनु महाराज गुम हुई पृथ्वी को ढूंढने के लिए निकले थे महाबली असुर पृथ्वी को रसातल में चुरा कर ले गया था। असुर का वध करने के लिए भगवान ने वराह का अवतार लिया था।
उन्होंने देवताओं और असुरों के जन्म को लेकर कहा कि ऋषि कश्यप की दो पत्नियों थी दिति और अदिति, दिति से देवताओं का जन्म हुआ और अदिति से राक्षसों का जन्म हुआ। संध्या काल में वेद पढ़ना,भोजन करना, निंद्रा लेना और संसार व्यवहार करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित है। कश्यप ऋषि और अदिति के संध्या काल में किए गए वर्जित व्यवहार के कारण असुर पुत्रों का जन्म हुआ था। ऐसे पुत्र सृष्टि के लिए हानिकारक होते हैं। अदिति को ऋषि कश्यप ने श्राप दिया था। भगवान को राक्षसों का वध करने के लिए चार बार अवतार लेना पड़ा था। संत ब्राह्मणों का अपमान करने पर भगवान श्री नारायण ने अपने द्वारपाल जय विजय को श्राप दे दिया था। हमें संत महात्माओं ब्राह्मण का कदापि अपमान नहीं करना चाहिए।
पृथ्वी पर उत्पाद मचाने वाले असुरो का वध करने के लिए भगवान को नरसिंह अवतार लेना पड़ा था भगवान नरसिंह ने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए उनके असुर पिता का वध कर दिया था।
पंडित श्री तिवारी ने शिव पार्वती विवाह को लेकर कहा कि भगवान महादेव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती ने हजारों सालों तक घोर तपस्या की थी इसके बाद उनका विवाह संपन्न हुआ था। भगवान भोलेनाथ की बारात में देवता और असुर सम्मिलित हुए थे। कथा पंडाल में शिव पार्वती बने कलाकारों की वरमाला भी कराई गई । भगवान श्री कृष्ण भगवान भोलेनाथ के मधुर भजनों पर श्रद्धालु महिलाएं भक्ति भाव के साथ नृत्य करती हुई दिखाई दी। श्रीमद् भागवत कथा रात 8 बजे से 11 तक हो रही है।

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