ग्राम महुआखेड़ी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव-रामलीला में कुंभकर्ण, मेघनाद वध:अंतिम दिन हुआ रावण-राम युद्ध का सजीव मंचन सत्संग से जीवन सफल हो जाता है, कुसंगत से जीवन नष्ट हो जाता-पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे


सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम महुआखेड़ी में सात दिवसीय विशाल एकादश कुण्डिय श्री रुद्र महायज्ञ शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत रामलीला का आयोजन किया गया था। इस मौके पर उज्जैन श्री महाकालेश्वर रामायण प्रचारक रामलीला मंडल का यज्ञाचार्य पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे, मुख्य यजमान सुरेश गब्बर परमार, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने रामलीला में भगवान राम, लक्ष्मण, सीता, रावण, कुंभकण, मेघनाद आदि करीब दो दर्जन से अधिक कलाकारों का स्वागत और सम्मान किया।

इस मौके पर पंडित श्री कटारे ने कहाकि हमारे पिता श्री और हमारा मंदिरों का ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जीर्णोंद्धार का एक ही मकसद है कि धर्म की रक्षा और सनातन एकजुट हो। मंदिरों में सभी ग्रामीण एकजुट होकर पूजा-अर्चना करे और सत्संग आदि करें, सत्संग से जीवन सफल हो जाता है, कुसंगत से जीवन नष्ट हो जाता है। कलयुग में भजन से ही जीवन का उद्धार हो सकता है। इस संसार में सब कुछ मिल सकता है, परंतु मां-बाप नहीं मिल सकते। अगर अपनी चमड़ी की चप्पल बनाकर भी मां-बाप को पहनाई जाए तो भी इनका कर्ज नहीं उतारा जा सकता।

रामलीला का मंचन

रामलीला मंचन के अंतिम दिन कुंभकर्ण युद्ध और वध, मेघनाद युद्ध तथा रावण-राम युद्ध का सजीव चित्रण किया गया। प्रसंग के अनुसार, रावण के दूतों ने लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होने की सूचना दी। अपनी सेना की पराजय से व्यथित रावण ने अनेक प्रयासों से अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाया। कुंभकर्ण रणभूमि में पहुंचा, जिसका विशालकाय शरीर देखकर वानर-भालू सेना भयभीत हो उठी। सुग्रीव ने उससे युद्ध किया और उसके नाक-कान काट लिए। सेना को व्याकुल देख प्रभु श्रीराम स्वयं युद्ध में उतरे और अंतत: कुंभकर्ण का वध कर दिया। उसका कटा हुआ मस्तक लंका जाकर गिरा, जिसे देखकर रावण दहाड़ मारकर विलाप करने लगा। इस पर देवताओं ने प्रसन्न होकर प्रभु पर पुष्पवर्षा की। इसके बाद श्रीराम ने बाण चलाकर मेघनाद को मूर्छित कर दिया। मूर्छा टूटने के बाद मेघनाद ने यज्ञ की तैयारी की। विभीषण ने श्रीराम को बताया कि यदि उसका यज्ञ पूर्ण हो गया, तो उसे मारना कठिन होगा। तब श्रीराम, लक्ष्मण और वानर-भालू सेना ने मिलकर उसका यज्ञ विध्वंस कराया। इसके बाद मेघनाद ने मायावी रूप धारण कर लक्ष्मण से युद्ध किया, जिसमें लक्ष्मण ने उसका वध कर दिया। हनुमान उसका शव लंका के द्वार पर रख आए। पुत्र का शव देखकर रावण मूर्छित हो गया। होश आने पर उसने मंदोदरी से कहा, यह संसार नाशवान है, सब कुछ ब्रह्मा का रचा हुआ प्रपंच है। अंत में राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें रावण का वध होने पर राम की सेना में जयकारे लगने लगे। 


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