मनोरंजन के लिए कथा मत सुनिए कथा संस्कार को जीवन में उतारिए/ पं रवि शंकर तिवारी हिंगलाज माता मंदिर कस्बा में श्रीमद् भागवत कथा आयोजन


सीहोर। हिंगलाज माता मंदिर कस्बा परिसर में आयोजित रात्रि कालीन श्रीमद् भागवत कथा में शुक्रवार की रात भागवत भूषण पंडित रविशंकर तिवारी ने कहा कि भगवान की कथा मनोरंजन के लिए नहीं जीवन में उता रने के लिए होती है। महाभारत समाप्ति करने के बाद श्रीमद् भागवत कथा शुरू होती है। वेदव्यास जी महाराज ने भागवत जी की रचना की है। कलयुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का होगा। कलयुग के अंत में लोग चने के झाड़ के नीचे बैठकर पंचायत कर लेंगे। घोर कलयुग में पाप अपने चरम पर होगा। अन्याय अत्याचार प्राकृतिक आपदाएं बढ़ जाएंगी। प्रभु स्मरण और मानवीयता जब पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगी तब कलयुग के अंत में भगवान कल्कि का अवतार होगा।


पंडित श्री तिवारी ने कहा कि राजा परीक्षित को अपमान करने पर ब्राह्मण देवता ने 7 दिन में सर्पदांत से मृत्यु का श्राप दिया था। राजा परीक्षित को तक्षक नाग से बचाने के लिए सुखदेव जी ने उन्हें भागवत कथा सुनाई थी। अंत में राजा परीक्षित की भगवान की कृपा से मृत्यु नहीं हुई वह मोक्ष को प्राप्त हुए।

उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति धर्म के लिए तत्पर रहता है भगवान भी उसकी मदद के लिए तत्पर रहते हैं। जिसके मन में छल कपट होता है उसे भगवान भी स्वीकार नहीं करते हैं। भक्त को केवल मनोरंजन के लिए कथा नहीं सुननी चाहिए।हरि कथा प्रसंग को गंभीरता पूर्वक श्रवण कर कथा संस्कार को जीवन में उतारना चाहिए।


भागवत बताती है मोक्ष का मार्ग


पंडित तिवारी ने कथा प्रसंग के दौरान कहा कि वेदव्यास जी महाराज ने सुखदेव बाबा को कथा सुनाई थी। भागवत कथा मोक्ष का रास्ता दिखाती है रामचरितमानस मनुष्य को पृथ्वी पर सुखपूर्वक मैत्री भाव के साथ जीना सिखाती है। रामचरितमानस जीवन को बदल देती है भाई भाई में प्रेम जगा देती है जिस प्रकार भगवान श्री राम जब वनवास चले जाते हैं तो उनके छोटे भाई भरत अपने सिर पर उनकी खड़ाऊ रखकर बड़े भाई के दायित्व को निभाते हैं और राज्य करते हैं लेकिन जैसे ही भगवान श्री राम अयोध्या पहुंचते हैं तब भरत जी उन्हें सहर्ष राज्य सत्ता सौंप देते हैं चारों भाई मिलजुल कर रहते थे। प्रजा भी सुख पूर्वक जीवन यापन करती है यही रामचरितमानस है।


हर घर में हो रही महाभारत बंद हो


पंडित श्री तिवारी ने आगे कहा कि रामचरितमानस रामायण की पोथी हर घर में होती है लेकिन कोई जीवन में रामायण को उतरता नहीं है जबकि महाभारत पोथी किसी घर में नहीं होती है लेकिन महाभारत हर घर में होती है भाइयों बहनों में पति-पत्नी में पिता और पुत्रों में छोटी बातों को लेकर महाभारत हो रही है। रामचरितमानस त्यागना छोड़ना सिखाती है भाई के लिए मरना भाई के लिए जीना सिखाती है। इसी प्रकार विभिन्न कथा प्रसंग के माध्यम से पंडित श्री तिवारी ने श्रद्धालुओं को भक्ति का मार्ग दिखाया।


हिंगलाज माता मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भावसार समाज महिला मंडल के द्वारा कराया जा रहा है। कथा शुभारंभ से पहले माता हिंगलाज की पूजा अर्चना की गई।


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