संत साईंजन का निधन, सीहोर में नगर में शोक की लहर श्रद्धालुओं ने दिव्य संत के स्नेह और आशीर्वाद को याद कर अर्पित की श्रद्धांजलि


सीहोर। नगरवासियों और श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन गहरा शोक लेकर आया है। प्रसिद्ध संत, साईंजन, अब इस लोक से विदा हो गए हैं। उनका सीहोर आगमन हमेशा किसी उत्सव और आध्यात्मिक पर्व से कम नहीं माना जाता था। नगर में उनकी खबर मात्र से श्रद्धा, प्रेम और उल्लास का वातावरण बन जाता था।


साईंजन केवल सिंधी समाज ही नहीं, बल्कि हर वर्ग और समुदाय के लोगों के लिए प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक स्नेह के प्रतीक थे। उनके दर्शन करने का अनुभव अनूठा और अलौकिक था। उनके चेहरे की मधुर मुस्कान, तेजस्वी दिव्यता और अपनापन मन को भीतर तक छू जाता था।


पत्रकार ए. आर. शेख मुंशी ने साझा किया कि सन 1992 में जब साईंजन पहली बार सीहोर पधारे थे, तब उनके वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री चंद्रकांत दसवानी जी को उनका विशेष स्नेह प्राप्त था। उन्हीं के माध्यम से मुंशी जी को उनके दर्शन का अवसर मिला। और मुंशी जी ने कहा स्वर्गीय पत्रकार चंद्रकांत दसवानी जी के साथ मेरे निजी कार्यालय गंगा आश्रम में भी साईंजन कसा आगमन हुआ

उनकी स्मृतियाँ, उनका स्नेह और उनका आशीर्वाद सदैव हमारे हृदयों में जीवित रहेंगे। उनका जाना केवल एक संत का नहीं, बल्कि असंख्य हृदयों से प्रेम और आत्मिक सहारे का दीप बुझ जाने जैसा है।”


साईंजन का विशेष गुण यह था कि हजारों लोग उनके दर्शन के लिए आते थे, लेकिन हर व्यक्ति को लगता था कि उनका प्रेम केवल उसी के लिए है। उनका आशीर्वाद और स्नेह हर किसी के लिए समान और निष्कलंक था।


नगर में उनके निधन की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। लोग उनके व्यक्तित्व, उनके प्रेम और उनकी करुणा को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।


उनकी अनुपस्थिति हमेशा महसूस की जाएगी, लेकिन उनकी स्मृतियाँ, उनके आशीर्वाद और उनका दिव्य स्नेह जीवनभर श्रद्धालुओं के हृदयों में जीवित रहेंगे।



Post a Comment

0 Comments