सीहोर। चाँदबड़ गौशाला में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का रविवार को भव्य शुभारंभ हुआ।



सीहोर। चाँदबड़ गौशाला में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का रविवार को भव्य शुभारंभ हुआ। मालवा के प्रसिद्ध संत पंडित कमल किशोर जी नागर के मुखारविंद से प्रारंभ हुई कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के प्रारंभ में संत श्री ने सभी श्रद्धालुओं को पुरुषोत्तम मास की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस पावन माह में कथा, भजन और सत्संग का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रद्धापूर्वक भगवान की कथा का श्रवण करने से मनुष्य का जीवन भी उत्तम बनने लगता है।

कथा के दौरान संत श्री नागर ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की भावना पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और भगवान से जुड़े उसके संबंध से तय होती है। जो व्यक्ति ईश्वर का आश्रय ग्रहण कर लेता है, वही वास्तव में श्रेष्ठ बन जाता है।

मानव स्वभाव का उल्लेख करते हुए संत श्री ने कहा कि सामान्यतः मनुष्य का मन भगवान की अपेक्षा भोग-विलास की ओर अधिक आकर्षित होता है। इसलिए जीवन में सत्संग और भजन की आवश्यकता है, जिससे मन को सही दिशा मिल सके। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति नियमित पूजा-पाठ न भी कर सके, तो कथा के माध्यम से संतों और भक्तों के जीवन का श्रवण एवं स्मरण कर अपने जीवन को धन्य बना सकता है।

संत श्री ने पुरुषोत्तम मास के सदुपयोग का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं से अधिकाधिक समय भजन, जप और सत्संग में लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े पुण्यों से प्राप्त होता है, इसलिए इसे केवल सांसारिक कार्यों में न लगाकर भगवान के स्मरण में भी लगाना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने तुलसी माला धारण करने तथा भगवान के नाम का निरंतर जप करने का महत्व भी बताया। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।

उल्लेखनीय है कि शनिवार रात आई तेज आंधी के कारण कथा स्थल पर लगाया गया पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद संत श्री नागर के निर्देश पर कथा का आयोजन गौशाला परिसर के भीतर किया गया। सुबह से मंच, ध्वनि व्यवस्था एवं अन्य तैयारियां की गईं, जिसके कारण कथा निर्धारित समय से लगभग ढाई घंटे विलंब से प्रारंभ हो सकी।

कथा के अंत में संत श्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गौशाला के पवित्र वातावरण में गौ-रज में बैठकर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होना उनके लिए विशेष आनंद और संतोष का विषय है। 


Post a Comment

0 Comments