सीहोर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर के तत्वावधान में वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन जिला न्यायालय परिसर, सीहोर में किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत भारत की वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है, जिसके अन्तर्गत न्यायालय में लम्बित तथा पूर्व-मुकदमेबाजी के प्रकरणों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया जाता है। इस प्रणाली की विशेषता यह है कि लोक अदालत द्वारा पारित अवार्ड अंतिम एवं बाध्यकारी होता है तथा उसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती, साथ ही पक्षकारों को न्यायालय शुल्क की वापसी का भी प्रावधान है, जिससे यह सामान्य नागरिकों के लिए त्वरित एवं नि:शुल्क न्याय का सशक्त माध्यम बनती है। इस मौके पर श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज, सीहोर के विधि संकाय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर, संजीव कुमार अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय वैभव मंडलोई, विशेष न्यायाधीश हेमंत जोशी, जिला न्यायाधीश श्रीमती स्मृतासिंह ठाकुर, जिला न्यायाधीश एमके वर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती विनीता गुप्ता, न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती स्वप्नश्री सिंह, अन्य न्यायाधीशगण तथा जिला विधिक सहायता अधिकारी जीशान खान उपस्थित रहे। लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, विद्युत एवं जल प्रकरण, बैंक वसूली तथा अन्य दीवानी प्रकरणों का निपटारा किया गया, जिससे अनेक पक्षकारों को दीर्घकालीन न्यायिक प्रक्रिया से मुक्ति मिली और उन्हें त्वरित न्याय की प्राप्ति हुई।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज, सीहोर के विधि संकाय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मुकेश तिवारी के कुशल मार्गदर्शन एवं विधि संकाय की डीन डॉ. अमृता सोनी के सक्रिय सहयोग से विधि संकाय के छात्र-छात्राओं को इस ऐतिहासिक न्यायिक प्रक्रिया को निकट से देखने, समझने एवं उसमें सहभागी बनने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। इस व्यावहारिक अनुभव ने विद्यार्थियों को न केवल वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया से परिचित कराया, अपितु उन्हें न्यायिक तंत्र की कार्यप्रणाली, पक्षकारों के अधिकार, समझौते की विधि एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका को भी व्यावहारिक धरातल पर समझने का अवसर दिया, जो किसी भी विधि विद्यार्थी के लिए कक्षा से परे की अमूल्य शिक्षा है।
इस अवसर पर विधि संकाय की विभागाध्यक्ष शोभा व्यास एवं सहायक प्राध्यापक अधिवक्ता यशवर्धन तिवारी के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं अनिल मालविया, पलक, अंजलि, दिव्या, प्रीति, मीना प्रसाद, हरिओम, उत्तरदीप, मेघा बैरागी एवं नीलेश चौहान सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की इस सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी की सभी उपस्थित न्यायिक अधिकारियों ने सराहना की तथा विधि विद्यार्थियों को इस प्रकार के कार्यक्रमों में निरन्तर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज विधि शिक्षा को व्यावहारिक एवं सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता के अन्तर्गत इस प्रकार के कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता सुनिश्चित करती है, ताकि विद्यार्थी भविष्य में एक सक्षम, संवेदनशील एवं जिम्मेदार विधि-व्यवसायी के रूप में समाज की सेवा कर सकें।

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