अपने जीवन को भगवान के आश्रित कर दो जो भगवान के आश्रित परमात्मा के आश्रित जीवन जीता है वह ईश्वर की प्राप्ति करता है जो मनुष्य भीड के आश्रित रहता है भीड उस को धक्का धोखा देती है, उक्त उद्गार ग्राम फूल मोगरा सीहोर में पवन पुरुषोत्तम मास के शुभ अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास परम गौभक्त क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत पंडित मोहितरामजी पाठक ने व्यक्ति की आगे कथा में वर्णन करते हुए कहा कि जब देवताओं पर संकट आया तो भगवान ने वामन रूप लेकर देवताओं की रक्षा करी इंद्र को उसका राज वापस दिलाया जब हम पर संकट आएगा तो भगवान भी किसी न किसी रूप में आकर हमारी रक्षा करेंगे।राजा बलि का पराक्रम और देवताओं की हार:
दैत्यराज बलि, जो भक्त प्रह्लाद के पौत्र थे, अत्यंत पराक्रमी और दानी थे। उन्होंने अपने गुरु शुक्राचार्य की सहायता से यज्ञ करके देवलोक पर विजय प्राप्त कर ली और तीनों लोकों के स्वामी बन गए। स्वर्ग से निकाले जाने के बाद सभी देवता लाचार होकर भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे।
भगवान विष्णु का जन्म:
देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे राजा बलि से उनका राज्य वापस दिलाएंगे। इसके लिए भगवान विष्णु ने महर्षि कश्यप और माता अदिति के घर वामन (बौने ब्राह्मण) के रूप में जन्म लिया। आज चतुर्थ दिवस की कथा में बड़े ही धूमधाम से भगवान बाल कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा आयोजन समिति ग्राम फूल मोगरा ने संपूर्ण क्षेत्र वासियों से कथा में पधार कर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया

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