नल-जल योजना बनी खुशहाल जीवन की धारा, दिव्यांग राजू पांडे को मिला सम्मानजनक रोजगार


सीहोर, 13 अप्रैल, 2026    प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी सोच और दूरदर्शी नीतियों का प्रभाव अब गांव-गांव में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसका एक उदाहरण सीहोर जिले के ग्राम मालिबाया में देखने को मिलता है, जहां जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) ने न केवल गांव की तस्वीर बदली, बल्कि एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में भी नई रोशनी भर दी।

  ग्राम मालिबाया, जो प्राकृतिक सुंदरता से घिरा एक छोटा सा गांव है, यहां के 168 परिवार वर्षों से पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। गांव की महिलाएं रोजाना 1 से 2 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर थीं। सुबह तड़के 4-5 बजे उठकर कुएं और हैंडपंप पर लंबी कतारें लगाना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। बारिश के दिनों में दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां भी आम हो गई थीं।

  इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार की जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत मर्दानपुर ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के माध्यम से गांव में घर-घर नल कनेक्शन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना शुरू हुआ। यह पहल गांव के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी।

 इस बदलाव की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है गांव के दिव्यांग निवासी राजू पांडे का जीवन। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, लेकिन दिव्यांग होने के कारण उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे थे। आर्थिक तंगी के कारण वे अपनी बेटी की पढ़ाई तक ठीक से नहीं करवा पा रहे थे।

लेकिन जल जीवन मिशन ने उनकी किस्मत बदल दी। गांव में नल-जल योजना के संचालन के लिए जब एक जिम्मेदार व्यक्ति की आवश्यकता पड़ी, तब राजू पांडे ने यह जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पूरे गांव में नियमित और सुचारू रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की, साथ ही जलकर वसूली का कार्य भी किया।

आज राजू पांडे को इस कार्य के बदले प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा भी दिला पा रहे हैं। समाज में उन्हें एक नई पहचान और सम्मान मिला है। राजू पांडे भावुक होकर कहते हैं कि “जल जीवन मिशन मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।”

    यह कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि मध्यप्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाएं केवल सुविधाएं ही नहीं दे रहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और खुशहाली भी ला रही हैं। नल-जल योजना ने जहां एक ओर गांव को जल संकट से मुक्ति दिलाई, वहीं दूसरी ओर एक दिव्यांग व्यक्ति को सम्मानजनक रोजगार देकर उसके जीवन को नई दिशा दी।

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