कोलीपुरा में दो दिवसीय श्री नरसिंह चरित्र कथा का भव्य आयोजन


सीहोर। सीहोर के कोलीपुरा स्थित श्री लक्ष्मी नरसिंह मंदिर में चल रही दो दिवसीय श्री नरसिंह चरित्र कथा में ज्योतिष एवं भागवत सिंधु आचार्य पंडित हर्षित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान नरसिंह की महिमा का विस्तृत वर्णन किया।

आचार्य हर्षित शास्त्री ने बताया कि भगवान नरसिंह के प्राकट्य का मूल कारण भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म का नाश करना था। कथा के दौरान भगवान नरसिंह के नौ रूपों का विस्तार से वर्णन किया गया तथा उनकी उपासना के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

उन्होंने कहा कि भगवान नरसिंह की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा भक्त को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही, नरसिंह मंदिर की प्रतिष्ठा और सेवा का विशेष फल बताया गया। मंदिर में झाड़ू लगाने जैसी साधारण सेवा भी अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है।

इस संदर्भ में रेवत नामक एक कथा सुनाई गई, जिसमें रेवत ने अनजाने में खंडहर पड़े नरसिंह मंदिर में झाड़ू लगाकर सफाई की और दीपदान किया। इस सेवा से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे अगले जन्म में राजा का पद प्रदान किया तथा अंतत: उसे अपने धाम में स्थान दिया।

कथा में आगे बताया गया कि भगवान नारायण के नाम जप और तपस्या के प्रभाव से महर्षि मार्कंडेय ने मृत्यु पर विजय प्राप्त की। इसके साथ ही भगवान वराह के प्राकट्य की कथा भी सुनाई गई, जिसमें उन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी का उद्धार किया। इस घटना के बाद हिरण्यकशिपु भयवश भागकर कठोर तपस्या में लीन हो गया।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान नरसिंह की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।


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