सीहोर। भगवान राम जी के साथ-साथ उनके सभी भाइयों का विवाह भी जनकपुर में संपन्न हुआ। महाराज दशरथ, रानियां तथा तमाम अयोध्यावासी प्रसन्न हैं। एक दिन राजा के मन में अपनी बढ़ती अवस्था को देखकर विचार आया कि अब राज्य का कार्यभार रामचंद्र को सौंप देना चाहिए। राम जन-जन के प्रिय थे, इसलिए सभी दरबारियों ने इसका समर्थन किया, लेकिन जन कल्याण के लिए भगवान श्रीराम का वनवास जाना तय था, इसलिए मंथरा ने कैकेयी के कान भर श्रीराम को वनवास दिलाया। उक्त विचार शहर के कंचन विहार, विश्वनाथपुरी में श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में जारी नौ दिवसीय श्रीराम कथा में महंत उद्ववदास महाराज ने कहे।
उन्होंने कहाकि सत्संग करो लेकिन कुसंग का सेवन नहीं करना चाहिए तभी सत्संग का असर होगा, हमारे आस-पास के लोग ही हमारे भविष्य का निर्माण करते है, इसलिए जहां पर भी भगवान की चर्चा हो रही हो, भलाई का कार्य हो रहा है, वहां पर सौ कार्य छोड़कर शामिल हो जाना चाहिए। नगर में इस बात का एलान हुआ कि कल रामचंद्र का राजतिलक किया जाएगा। यह सूचना रानी कैकेयी की विशेष दासी मंथरा ने भी सुनी और जाकर रानी कैकेयी को मशविरा दिया कि वो राम के बदले अपने पुत्र भरत के लिए राज्य मांग लें और राम को 14 वर्षों के लिए वनवास भिजवा दें। कैकेयी पहले तो इसके लिए तैयार नहीं थीं मगर मंथरा की बातों में आकर सहमति दे दी। कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान प्राप्त करने थे। मंथरा के कहने पर यही दोनों बातें वरदान में मांग लीं। राजा बहुत दुखी हुए, रानी को समझाया, मिन्नतें की मगर रानी अपनी बात पर अड़ी रहीं। श्रीराम ने सुना तो पिता के वचन की लाज रखने के लिए सहर्ष वन जाने को तैयार हो गए।
आज की कथा की मुख्य बातें एवं प्रमुख प्रसंग
1. मित्र दर्पण जैसा होना चाहिए जो अच्छाई के साथ बुराई भी बताये
2. सतसंग करो लेकिन कुसंग का सेवन नहीं करना चाहिए तभी सत्संग का असर होगा
3. मंथरा केकयी दशरथ प्रसंग
4. माता पिता की आज्ञा पालन पुत्र का प्रथम धर्म होता है।
5. श्री राम की चरित्र की विशेषता है की बुराई में भी अच्छा ही ढूंढ लेते हैं श्री राम ने बताएं वन जाने में निम्न 4 लाभ-पहले मेरे प्राण प्रिय भाई भारत को राज मिलेगा, दूसरा मेरी प्राणप्रिय माता केकई का मनोरथ पूर्ण होगा, तीसरा मेरे पिता जो कि रघुकुल के प्रतापी एवम धर्मशील राजा हैं उनका धर्म बचा रहेगा, वन में रहने के दौरान मुझे संतों से सत्संग का अवसर प्राप्त होगा।
6. बचपन में मां के द्वारा दी गई शिक्षा जीवन भर साथ देती है और जवानी में महात्मा के द्वारा दी गई शिक्षा हमारे जीवन को सुखी बनाती है।
7. वनवास के समय भगवान राम ने इस प्रयोजन से लक्ष्मण को धर्म का उपदेश किया कि लक्ष्मण अयोध्या में ही रुक जाए श्री राम ने कहा कि माता-पिता और गुरु की सेवा करना व्यक्ति का सबसे बड़ा धर्म है इस पर श्री लक्ष्मण ने जवाब दिया कि मेरे माता-पिता गुरु सब आप हैं धर्म के पालन से स्वर्ग मिलेगा आपके साथ वन जाने पर मैं अपने इस धर्म से भले ही वंचित हो जाऊं पर मैं आपके चरण कमल नहीं छोड़ सकता मेरे लिए तो आपके चरण कमल ही स्वर्ग है । मुझे दूसरे किसी स्वर्ग की कामना नहीं है।


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