सीहोर। शहर के इतिहास में पहली बार कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में होने वाले भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की तैयारियां पूर्ण हो गई है। बुधवार को श्री-श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री महंत रामभूषण दास महाराज के मार्गदर्शन में सुबह भव्य यज्ञ शाला का शिखर स्थापित किया गया। इस मौके पर मंदिर के अधिकारी संत श्री माधव दास महाराज के सानिध्य में पूर्ण विधि-विधान के साथ वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय, श्रीमती नमिता राय, यज्ञाचार्य पंडित कुणाल, सन्नी सरदार, संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा सहित मंदिर परिवार के द्वारा पूर्ण विधि-विधान से भगवान गणेश का आह्वान किया गया।
इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय ने यहां पर प्रचार रथ और संतों को प्रचार-प्रसार के लिए रवाना किया। आयोजन समिति की ओर से सन्नी राजपाल सरदार ने बताया कि शहर के इतिहास में होने वाले महायज्ञ के पूर्व एक भव्य महाकुंभ कलश यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों पर निकाली जाएगी। इसमें देश भर से नागा साधु, संत, त्यागी, बैरागी और निहंग सरदार शामिल होंगे। इसके अलावा एक हजार से अधिक महिलाएं कलश यात्रा में शामिल रहेंगे। ऐसे आयोजनों में सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है, जिसमें महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं। वहीं निहंग गुरु गोविंद सिंह द्वारा स्थापित पंथ का हिस्सा हैं, जो वीरता और आस्था के प्रतीक माने जाते हैं।
महायज्ञ के द्वारा जीवन में स्थिरता, सुख-शांति और धन-धान्य की अपार वृद्धि होती है
श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर के अधिकारी संत श्री माधव दास महाराज ने बताया कि प्राचीन सिद्धपीठ में होने वाले पंच कुण्डीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ 26 अपै्रल से किया जाएगा। महायज्ञ के द्वारा जीवन में स्थिरता, सुख-शांति और धन-धान्य की अपार वृद्धि होती है। यह जीवन के सभी दुखों, दरिद्रता, ऋणों और नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने में सक्षम है। व्यवसाय में आ रही रुकावटों को दूर करने और तरक्की के लिए इस यज्ञ का विशेष विधान है। यह परिवार में प्यार और मधुर संबंध बढ़ाने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। महायज्ञ में सम्मिलित होने से उपासकों को पुण्य लाभ और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। सभी यज्ञों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस यज्ञ के माध्यम से ईश्वर की आराधना कर भक्त अपने जीवन में कल्याण की कामना करते हैं।

0 Comments