सीहोर। मालवा की ऐतिहासिक धरती सीहोर में दो दिनों तक चले शब्दों के महाकुंभ 'सीहोर लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को अत्यंत गरिमामय और सांस्कृतिक उल्लास के साथ समापन हुआ। शिवना प्रकाशन द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने न केवल साहित्य की गंभीर विधाओं पर चर्चा की, बल्कि लोक कला और उत्सव के रंगों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
लोक संस्कृति का संगम: प्रहलाद प्रजापति की फाग प्रस्तुति
कार्यक्रम के अंतिम सत्र की जानकारी देते हुए शिवना प्रकाशन के पंकज सुबीर ने बताया कि समापन समारोह 'सिद्धपुर सभामंडप में आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध कलाकार प्रहलाद प्रजापति का फाग गायन रहा। प्रजापति ने जब मालवी और बुंदेली लोक धुनों पर फाग गीतों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। गीतों के साथ ही 'फूलों की होलीÓ का आयोजन किया गया, जहाँ साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा कर प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया।
तीन सभागारों में चला वैचारिक मंथन
महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को सुबह से ही तीन अलग-अलग सभागारों—सिद्धपुर सभामंडप, सिपाही बहादुर सभागार और कुँवर चैनसिंह सभागार—में समानांतर सत्रों का आयोजन हुआ।
साहित्यिक पाठशाला और विमश:र् दिन की शुरुआत 'उपन्यास की पाठशालाÓ और 'क्या है व्यंग्य विधा का भविष्य?Ó जैसे सत्रों से हुई। वक्ताओं ने उभरते लेखकों को लेखन की बारीकियों से अवगत कराया। वहीं, 'कलाओं की विरासतÓ और 'कथेतर साहित्य की बढ़ती लोकप्रियताÓ पर भी विद्वानों ने अपने विचार रखे।
मीडिया और समाज: '2 डिबेट या न्यूज़... क्या चाहता है दर्शक?Ó विषय पर हुई चर्चा में वर्तमान मीडिया परिदृश्य और दर्शकों की बदलती पसंद पर तीखे सवाल-जवाब हुए।
क्षेत्रीय अस्मिता: 'मालवा-निमाड़ के कथाकारों की उपेक्षाÓ सत्र में स्थानीय साहित्यकारों को मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही, 'पुलिस सेवा में रहते हुए साहित्य सृजनÓ जैसे अनूठे सत्र ने यह दिखाया कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच भी संवेदनाएँ कैसे जीवित रहती हैं।
काव्य और महिला विमश:र् दोपहर के सत्रों में 'कविता पाठÓ और 'वामा इंदौर- आधी आबादी की आवाज़Ó जैसे सत्रों ने समाज के विभिन्न पहलुओं को छुआ।
आयोजन समिति का सक्रिय योगदान
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों—यतीन्द्र मिश्र, यशपाल शर्मा, अखिलेश राय, मनीषा कुलश्रेष्ठ और ज्योति जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन सत्र का कुशल संचालन विनय उपाध्याय द्वारा किया गया।
आभार प्रदर्शन और विदाई
कार्यक्रम के अंत में शशिकांत यादव ने विधिवत आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन, स्थानीय सहयोगियों, देशभर से आए वक्ताओं और सीहोर की साहित्यप्रेमी जनता का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक विचार है जो आने वाले समय में सीहोर को सांस्कृतिक मानचित्र पर और ऊँचा स्थान दिलाएगा।
शाम 5:00 बजे चाय और अल्पाहार के साथ इस दो दिवसीय उत्सव का विसर्जन हुआ। विदाई की बेला में हर किसी की आँखों में अगले वर्ष फिर मिलने की उम्मीद और शब्दों की नई ऊर्जा साफ दिखाई दे रही थी।


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