सीहोर। सीहोर जिले के ग्राम चन्देरी सहित रायपुरा, फन्दा, कोडिय़ा, बिलकिसगंज, छापरी, सेवनिया, बड़वेली, थूना, खामलिया, चोण्डी, तज, अमरौद, रामाखेड़ी, अल्हादाखेड़ी सहित सभी गावों के मेवाड़ा राजपूत समाज ने एक अहम सामाजिक निर्णय लिया है। मेवाड़ा राजपूत समाज के सीहोर जिला अध्यक्ष नारायण सिंह पटेल एवं समाज सेवी एम.एस.मेवाड़ा ने बताया कि होली पर बताशे और बर्तन देने की प्रथा बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय समाज की एकजुटता और प्रगति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्या है फैसला?
होली के अवसर पर पारंपरिक रूप से गमी वाले घर पर रिश्तेदारों या समाज में बताशे और बर्तन देने की जो परंपरा चली आ रही थी, उसे अब समाप्त किया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों का मानना है कि इस परंपरा से आर्थिक बोझ बढ़ता है, अनावश्यक दिखावा और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है। समाज में समानता और सरलता प्रभावित होती है।
फैसले का मुख्य उद्देश्य
सामाजिक एकता को मजबूत करना, फिजूलखर्ची पर रोक लगाना, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रगति की ओर ले जाना, नई पीढ़ी को सरल और सकारात्मक परंपराओं की ओर प्रेरित करना।
सामाजिक संदेश
किसान व समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा ने कहा कि प्रदेश व जिले के मेवाड़ा व राजपूत समाज का यह निर्णय दर्शाता है कि परंपराओं में समयानुसार बदलाव करना जरूरी है, खासकर जब वे आर्थिक या सामाजिक रूप से बोझिल बन जाएं। उन्हाने सभी सामाजिक बन्धुओं से विशेष अपील की है कि वे इस निर्णय का पालन करें और समाज को प्रगति की राह पर ले जाने के लिये आपसी सौहार्द व एकजुटता का परिचय दें। ताकि यह कदम अन्य समाजों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है क्योंकि सामूहिक सहमति से सामाजिक सुधार संभव है। श्री मेवाड़ा ने होली के इस पावन पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उक्त सकारात्मक मूहिम का असर वर्तमान में देखने को भी मिल रहा है और मैं आशा व्यक्त करता हूं कि समाजहित में चलाई जा रही यह मूहिम शत् प्रतिशत सफल

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