सीहोर l ग्रहों के राजा सूर्य देव प्रति माह राशि परिवर्तन करते हैं भारतीय सनातन धर्म में सूर्य का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना गया है l मांगलिक कार्य के लिए सूर्यदेव उच्च अवस्था में होना चाहिए l
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार खरमास के दिनों में सभी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं l सूर्यदेव कुंभ राशि से 14 मार्च रात्रि में राशि परिवर्तन कर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे l जिससे खरमास का प्रारंभ होगा इसे मीन संक्रांति कहा जाता है l इस बार मीन संक्रांति पर एकादशी का भी सहयोग रहेगा l सूर्यदेव 14 अप्रैल तक मीन राशि में गोचर करेंगे l
शास्त्र अनुसार सनातन धर्म में खरमास में मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। एक माह पश्चात जब सूर्यदेव सेनापति मंगल की मेष राशि में प्रवेश करेंगे तो खरमास पूर्ण हो जाएगा और खरमास पूर्ण हो जाने पर समस्त प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य सगाई, विवाह,मुंडन, यज्ञोपवीत संस्कार, नवीन कारोबार, गृह प्रवेश प्रारंभ होंगे l खरमास में करें ये काम- पंडित सुनील शर्मा के अनुसार शास्त्रों में वर्णन है कि खरमास में सूर्य देव की उपासना की जानी चाहिए । इस दौरान सूर्य पाठ, सूर्य चालीसा, आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य के मंत्रों का जाप करना चाहिए। प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को प्रणाम कर अर्ध्ये देना चाहिए l
इस दौरान तीर्थों में स्नान, दीपदान और जरूरतमंदों को उपयोगी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है और इससे हर कार्य की सिद्धि होती है। पूजा पाठ, कथा और व्रत करने में भी कोई दोष नहीं होता है। खरमास की अवधि में जप-तप और दान इत्यादि करने का फल अत्यlधिक मिलता है। इस माह में तुलसी माता व पीपल पूजा, गौ सेवा, शिव शक्ति की आराधना, सूर्य उपासना,j भगवान श्री विष्णुजी के नाम जप मंत्र जप, श्री गीता पाठ श्री रामचरितमानस श्री सत्यनारायण जी की कथा काफी शुभ फलदायक होते है l

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