वरिष्ठ साहित्यकार स्व. रमेश गोहिया स्मृति सम्मान समारोह आयोजित बुजुर्ग कवि देवकरण पंवार हुए साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित साहित्यकारों का सम्मान उन्हें बेहतर लिखने की प्रेरणा देता है-राकेश राय साहित्य सृजन के लिए अध्ययन के साथ संवेदनशील होना भी अनिवार्य है -रघुवर गोहिया


सीहोर। रविवार को सुकवि प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार स्व. श्री रमेश गोहिया की तृतीय पुण्य तिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया गया। इस अवसर पर स्थानीय रैंबो पब्लिक स्कूल में श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं स्व. रमेश गोहिया के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन कर किया गया। सरस्वती वंदना कवि जोरावर सिंह ने प्रस्तुत की। समारोह के मुख्य अतिथि जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष और वरिष्ठ समाजसेवी श्री राकेश राय थे। अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी श्री ओमदीप ने की। विशेष अतिथि के रूप में इटारसी के वरिष्ठ गीतकार श्री रामकिशोर नाविक तथा भारतीय पत्रकार संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दयाल गोहिया उपस्थित थे।

साहित्यकारों का सम्मान उन्हें बेहतर लिखने की प्रेरणा देता है-राकेश राय

11 हजार रुपये देने की घोषणा की

अपने संबोधन में श्री राय ने कहा कि अपने शहर के साहित्यकारों का सम्मान हमें करते रहना चाहिए। इससे उन्हें निरंतर लिखते रहने की प्रेरणा मिलती है। मेरे बड़े भाई समान स्व. रमेश गोहिया अपनी सुमधुर आवाज के साथ कलम के धनी थे। जब तक वे जीवित रहे तब तक निरंतर अपने लेखन और काव्य गोष्ठियों के माध्यम से नवोदित लेखकों को प्रेरणा देते रहे। उनकी स्मृति में यह आयोजन करने के लिए मैं अभा साहित्य परिषद के जिला अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र जायसवाल तथा भाई रघुवर गोहिया को हार्दिक बधाई देता हूं। इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। मेरा सहयोग और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा।

11 हजार रुपये देने की घोषणा

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री राकेश राय ने स्व. रमेश गोहिया स्मृति साधक सम्मान का आयोजन करने के लिये 11 हजार रुपए देने की घोषणा भी। जिसका सभी उपस्थितों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

साहित्य सृजन के लिए अध्ययन के साथ संवेदनशील होना भी अनिवार्य है -रघुवर गोहिया

आयोजन और स्व. श्री रमेश गोहिया के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से जानकारी रघुवर दयाल गोहिया ने दी।

उन्होंने कहा कि आदरणीय भाई साहब स्वभाव से बेहद विनम्र, सहज, सरल, निरंतर लिखने और पढ़ने वाले संवेदनशील व्यक्ति थे। उनकी रचनाओं में हमें अपनी मिट्टी से जुड़ाव, प्रेम, विरह, देश भक्ति और जीवन का संघर्ष नजर आता है। शायद यही वजह है कि उनके काव्य संग्रह का शीर्षक भी दर्द ही हमारा है रखा गया है। मुझ पर भी उनकी कविताओं व गीतों का गहरा प्रभाव पड़ा है। इस कारण से गीत, कविताएं लिखने की प्रेरणा मिलती रही। उन्होंने कहा कि अगर हमें बेहतर साहित्य सृजन करना है तो अधिक से अधिक अध्ययन की आदत डालना होगी। साथ ही हमें उतना ही संवेदनशील भी रहना होगा तभी हम कुछ नया लिखने में समर्थ होंगे।

अंत में उन्होंने आयोजक संस्था अभा साहित्य परिषद सीहोर जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. ब्रिजेंद्र जायसवाल और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

इन्होंने भी किया संबोधित

कार्यक्रम को श्री रामचंद्र मिश्रा गुरुजी, समाजसेवी ओमदीप, रामकिशोर नाविक, श्रीमती मांडवी सिंह भोपाल अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सीहोर जिला पालक, हरिओम शर्मा ने भी संबोधित किया।

साहित्यकार देवकरण पंवार हुए सम्मानित

इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री देवकरण पंवार को स्व. रमेश गोहिया स्मृति साहित्य साधक सम्मान से अतिथियों द्वारा विभूषित किया गया।

समारोह का सफल संचालन डॉ. प्रदीप चौहान ने किया।

काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाईं अपनी रचनाएं

इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। काव्य गोष्ठी में सर्वश्री रामनारायण राठौर, हरिओम शर्मा दाऊ, देवकरण पंवार,द्वारिका बांसुरिया, विनोद पंसारी, त्रिलोचन प्रसाद दुबे, हीरालाल जायसवाल अनाड़ी, ओम दीप, जोरावर सिंह, हीरालाल शर्मा, गोविन्द लोवानिया, नन्नू लाल सगर, शिवनारायण सगर, मांडवी सिंह, कैलाश चव्हाण, संतोष जैन संतू, डॉ. विजेन्द्र जायसवाल, राहुल ठाकुर आदि ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया।

समारोह में वरिष्ठ पत्रकार जुगल किशोर पटेल, वरिष्ठ पत्रकार सक्षम पालीवाल, शैलेंद्र पहलवान, लईक अंसारी, बीसी जैन, वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह, पत्रकार नितिन जौहरी, समाजसेवी कुतुबुद्दीन शेख, सुनील काबरे, गोबिंद शर्मा, समाजसेवी प्रदीप चावड़ा आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

अंत में सभी का आभार डॉ. विजेन्द्र जायसवाल ने व्यक्त किया।


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