भोपाल | विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना के पावन पर्व बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर भोपाल स्थित कमला रेजीडेंसी में मां सरस्वती जी की पूजा के दौरान ही एक गरिमामय साहित्यिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर म.प्र. पाठ्यचर्या समिति के स्थाई सदस्य डॉ. भगीरथ कुमरावत जी एवं डॉ. विनय सिंह चौहान जी के कर-कमलों से लेखक डॉ. मंगलेश जायसवाल के नवीनतम कहानी संग्रह 'पुनर्मिलन' का विमोचन किया गया।
मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज
विमोचन के दौरान डॉ. मंगलेश जायसवाल ने अपनी कृति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 'पुनर्मिलन' पूर्णतः मानवीय मूल्यों पर आधारित कहानियों का संग्रह है। उन्होंने साझा किया कि इस कृति को रचने की प्रेरणा उन्हें राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित 'सार्वभौमिक मानवीय मूल्य' की वर्कशॉप से प्राप्त हुई। पुस्तक की प्रथम प्रति मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह जी को सादर भेंट की गई।
साहित्यकारों का जुटा समागम
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वह 'ईश्वरीय संयोग' रहा, जब बसंत पंचमी के पूजन के लिए एकत्रित हुए विद्वजनों के बीच अनायास ही पुस्तक विमोचन का मंगल योग बना। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
डॉ. दशरथ मसानिया (चालीसा सम्राट)
श्री बी. एम. चौबे प्रदेश के कई प्रतिष्ठित लेखक एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।
लेखकीय यात्रा की तीसरी सफलता
डॉ. मंगलेश जायसवाल की यह तीसरी साहित्यिक कृति है। इससे पूर्व उनके कहानी संग्रह 'मीठा नीम' (जनवरी 2025) और काव्य संग्रह 'भाव मंजरी' (अक्टूबर 2021) को पाठकों की भरपूर सराहना मिल चुकी है। पुनर्मिलन कहानी संग्रह भी समदर्शी प्रकाशन गाज़ियाबाद से मुद्रित है। विद्वान योगेश समदर्शी जी के मार्गदर्शन में डॉ मंगलेश की यह तीसरी पुस्तक का प्रकाशन हुआ है गौरतलब हैं कि डॉ. जायसवाल मूलतः शाजापुर जिले के छोटे से नगर कालापीपल के निवासी है वे डिजिटल प्लेटफॉर्म 'प्रतिलिपि' के चर्चित धारावाहिक 'मेड इन लव' और 'संस्कारों की विरासत' के लिए 'सुपर लेखक अवॉर्ड' से भी नवाजे जा चुके हैं।
इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने 'पुनर्मिलन' को वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों के पुनरुत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कृति बताया।

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